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CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर निकले, लिखित आश्वासन के बाद आज मिली है जमानत

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Oct 21, 2026 09:07 pm IST,  Updated : Oct 21, 2026 10:02 pm IST

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर निकल आए हैं। लिखित आश्वासन के बाद उन्हें जमानत मिली है। सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर है।

Ashutosh Ranka, Saurav Das- India TV Hindi
CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर निकल आए Image Source : PTI

नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर निकल आए हैं। गौरतलब है कि लिखित आश्वासन के बाद उन्हें आज ही जमानत मिली है। उनकी जमानत से सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर है।

दोनों किस जेल नंबर में बंद थे?

आशुतोष रांका जेल नंबर 4 में बंद थे और सौरव दास जेल नंबर 2 में बंद थे।

अदालत ने दोनों की रिहाई का आदेश दिया

दिल्ली में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में अहम आदेश जारी किया। अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की पुलिस की मांग खारिज कर दी और 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।

14 अक्टूबर 2026 को आशुतोष रांका और सौरव दास को शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के आधार पर निवारक कार्रवाई के तहत अदालत में पेश किया गया था।

शुरुआत में अदालत ने दोनों को पांच दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था। बाद में हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई, जो 21 अक्टूबर 2026 तक थी। 21 अक्टूबर को जांच अधिकारी ने अदालत में एक नया आवेदन देकर दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की।

पुलिस की ओर से दलील दी गई कि दोनों के आचरण, मीडिया और अदालत में दिए गए बयानों के बीच कथित अंतर और उनके रुख में बदलाव को देखते हुए कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

अदालत में माफी और लिखित आश्वासन

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल ले जाते समय मीडिया को दिए गए एक बयान को लेकर बिना शर्त मौखिक माफी पेश की गई। आरोप था कि इस बयान से स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत की गरिमा प्रभावित हुई थी। इसके अलावा, आशुतोष रांका और सौरव दास ने अदालत में स्वेच्छा से लिखित आश्वासन दिए कि:

  • वे शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे।
  • उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।
  • जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिसूचित सूची से हटाए जाने तक वहां प्रदर्शन करने का आह्वान नहीं करेंगे।
  • भविष्य में होने वाले किसी भी प्रदर्शन को संविधान के दायरे में रखेंगे।

अदालत ने माना कि इस स्तर पर दोनों को आगे न्यायिक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। आदेश के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत निवारक कार्रवाई के उद्देश्य को बॉन्ड और लिखित आश्वासनों के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।

अदालत ने पुलिस की ओर से न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। दोनों को जांच की कार्यवाही पूरी होने तक 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बॉन्ड प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया गया।

दोनों की ओर से बॉन्ड जमा किए जाने और जमानतदारों के दस्तावेजों की प्रथम दृष्टया जांच के बाद अदालत ने तत्काल रिहाई का आदेश जारी किया। इसके लिए तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिहाई वारंट भेजा गया।

अदालत ने मामले में कुछ शर्तें और निर्देश भी तय किए

  • जांच अधिकारी अगली सुनवाई तक जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट पेश करेंगे।
  • दोनों प्रतिवादियों को प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होना होगा।
  • जमानतदारों को भी सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहना होगा।
  • दोनों को कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
  • अदालत में दिए गए लिखित आश्वासनों का सख्ती से पालन करना होगा।

अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, समय-दोपहर 3:00 बजे होगी।

इससे पहले दिपके की अपील सामने आई थी और उन्होंने कहा था कि दिवाली तक CJP प्रोटेस्ट नहीं करेगी। 

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