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मुंबई की बाढ़ बनी बड़ा संकेत, क्लाइमेट चेंज बदल रहा भारतीय मानसून का पैटर्न, जानिए क्या बोले विशेषज्ञ?

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Jul 07, 2026 10:25 pm IST,  Updated : Jul 07, 2026 10:31 pm IST

देशभर में बारिश हो रही है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई बारिश के चलते बेहाल है। ऐसे में मौसम विभाग के विशेषज्ञों ने बताया है कि आखिर भारतीय मानसून का पैटर्न क्यों बदल रहा है?

मुंबई में हो रही भारी बारिश- India TV Hindi
मुंबई में हो रही भारी बारिश Image Source : PTI

जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि 'अल नीनो' और जलवायु परिवर्तन को अलग-अलग कर नहीं देखा जा सकता है। क्योंकि एक के चलते बारिश में देरी होती है, जबकि दूसरा उसकी भयावह को बढ़ाता है। प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनो के कारण मानसून के आगमन में देरी हुई है। जून महीने के दौरान बारिश सामान्य से कम रही। इसके चलते महीने के अंत तक भारत में बारिश की कमी 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। हालांकि, कुछ ही दिनों में स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। जून के अंत तक मानसून के सक्रिय चरण में प्रवेश करते ही मुंबई और भारत के पश्चिमी तट के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश ने कहर बरपाया है। 

देशभर में कई मौसम प्रणालियां प्रभावी

विशेषज्ञों का कहना है कि नई वास्तविकता यह है कि जलवायु परिवर्तन भारतीय मानसून में मूलभूत बदलाव ला रहा है। 'स्काईमेट वेदर' के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने कहा, 'फिलहाल मानसून सक्रिय चरण में है। देशभर में कई मौसम प्रणालियां प्रभावी हैं। ओडिशा के ऊपर निम्न वायु दाब का क्षेत्र और महाराष्ट्र के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ था, जिससे मानसून की पश्चिमी और पूर्वी शाखाएं सक्रिय बनी रहीं।'

पलावत ने कहा, 'इसके साथ ही अरब सागर से लगातार मिल रही आर्द्रता के कारण पिछले तीन-चार दिनों में महाराष्ट्र के ऊपर बादलों का निर्माण होता रहा, जिसके चलते भारी बारिश हुई।' मैरीलैंड विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर और आईआईटी-मुंबई के सेवानिवृत्त प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे ने बताया कि मुंबई में मानसून के आगमन में देरी हुई, जिसकी आंशिक व्याख्या अल नीनो के प्रभाव से की जा सकती है। 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ रही गर्मी

उन्होंने कहा, 'लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण पश्चिम एशिया में बढ़ रही गर्मी और अरब सागर की हवाओं में आया बदलाव अपेक्षित रूप से अपना प्रभाव दिखा रहा है। तेज हवाओं का चलना भी जारी है, जो मानसून के मुख्य क्षेत्र में हो रही भारी बारिश का एक बड़ा कारण है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों ही देश के अंदरूनी हिस्सों में भारी बारिश के लिए नमी पहुंचा रहे हैं। अब अल नीनो को वैश्विक तापवृद्धि से अलग करके नहीं देखा जा सकता।'

मुंबई एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' सेक्शन के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन
Image Source : PTIमुंबई एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' सेक्शन के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन

जानिए क्यों हो रही मुंबई में ज्यादा बारिश?

मुर्तुगुड्डे ने कहा, 'अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों में मौसमी परिस्थितियां सक्रिय हैं और बंगाल की खाड़ी से एक निम्न वायु दाब क्षेत्र भी बन रहा है। जब ऐसा होता है और दोनों ओर की मौसम प्रणालियां सक्रिय हो जाती हैं, तो मानसून के मुख्य क्षेत्र में भारी बारिश होती है। साथ ही यह नमी मुंबई तक भी पहुंचती है। पश्चिमी घाट हवाओं को ऊपर उठने के लिए मजबूर करते हैं, जिसके कारण मुंबई में भारी बारिश होती है।'

अल नीनो से बारिश के दिनों की संख्या में आती है कमी

वैज्ञानिकों का कहना है कि अब अल नीनो और जलवायु परिवर्तन को अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। जहां अल नीनो मानसून परिसंचरण को प्रभावित करता है और अक्सर बारिश वाले दिनों की संख्या में कमी लाता है, वहीं अरब सागर के रिकॉर्ड तापमान और बदलते वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण वातावरण में नमी की उपलब्धता बढ़ रही है। इससे अनुकूल परिस्थितियां बनने पर मौसम प्रणालियां पहले की तुलना में कहीं अधिक भारी बारिश करा रही हैं। 

पलावत ने कहा, 'अल नीनो बारिश में देरी कर रहा है, जबकि जलवायु परिवर्तन इसकी विभीषिका को बढ़ा रहा है। पिछले कुछ सालों में मानसून की गतिशीलता में बदलाव आया है, जिसे सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ा जा सकता है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां अब उत्तर-पश्चिम दिशा की बजाय पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही हैं।' भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व महानिदेशक के.जे. रमेश ने बताया कि अल नीनो वाले सालों में बारिश वाले दिनों की संख्या कम हो जाती है। 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण मानसून का स्वरूप बदला

उन्होंने कहा, 'लेकिन हम जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मानसून का स्वरूप हमेशा के लिए बदल गया है। चाहे अल नीनो हो या न हो, अब बारिश कम अवधि में और काफी मूसलाधार होगी। देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बारिश के बदलते पैटर्न में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न असामान्य बदलाव देखे जा सकते हैं।' 

इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'इन दिनों पश्चिमी विक्षोभ और उनसे जुड़ी मौसम प्रणालियों के कारण राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश में पर्याप्त बारिश हो रही है। हम सभी जानते हैं कि केवल पश्चिमी विक्षोभ इन क्षेत्रों में बारिश कराने में सक्षम नहीं होते, लेकिन अरब सागर से बढ़ी हुई नमी की आपूर्ति ने इन इलाकों में बारिश के पैटर्न को बदल दिया है।'

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