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Bharat Bandh: न बैंक खुलेंगे, न बस चलेगी... कल 25 करोड़ कर्मचारी जाएंगे हड़ताल पर

 Edited By: Malaika Imam
 Published : Jul 08, 2025 09:17 am IST,  Updated : Jul 08, 2025 01:19 pm IST

Bharat Bandh Update: बुधवार को 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह हड़ताल केंद्र सरकार की "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों" के विरोध में की जा रही है।

राष्ट्रव्यापी हड़ताल - India TV Hindi
राष्ट्रव्यापी हड़ताल

Nationwide Strike: बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाओं से लेकर कोयला खनन तक के विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेने की उम्मीद है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त मंच द्वारा बुलाई गई इस हड़ताल को 'भारत बंद' करार दिया गया है। यह हड़ताल केंद्र सरकार की "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों" के विरोध में की जा रही है।

ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को एक बड़ी सफलता बनाने का आह्वान किया है, जिसमें औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में महीनों की गहन तैयारियों का हवाला दिया गया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की अमरजीत कौर ने बताया, "हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के भाग लेने की उम्मीद है। किसान और ग्रामीण श्रमिक भी देश भर में विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।"

कौन-कौन सी सेवाएं होंगी प्रभावित?

इस व्यापक कार्रवाई से प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं और उद्योगों पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा, "हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक, कोयला खनन, कारखाने और राज्य परिवहन सेवाएं प्रभावित होंगी।"

विरोध का मूल कारण यूनियनों द्वारा पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपी गई 17 मांगों का एक चार्टर है। यूनियनों का दावा है कि सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज किया है और पिछले एक दशक से वार्षिक श्रम सम्मेलन बुलाने में विफल रही है। उनका कहना है कि यह कदम श्रम बल के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।

श्रम कोडों को लेकर नाराजगी

एक संयुक्त बयान में, मंच ने आरोप लगाया कि सरकार के श्रम सुधार, जिसमें चार नए श्रम कोडों की शुरुआत भी शामिल है, श्रमिकों के अधिकारों को खत्म करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। यूनियनों का तर्क है कि ये कोड सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करने, संघ की गतिविधियों को कमजोर करने, काम के घंटे बढ़ाने और नियोक्ताओं को श्रम कानूनों के तहत जवाबदेही से बचाने का है।

सरकार की नीतियों का विरोध

मंच ने कहा कि सरकार ने देश की कल्याणकारी राज्य की स्थिति को छोड़ दिया है और वह विदेशी और भारतीय कॉर्पोरेट्स के हित में काम कर रही है, और यह उसकी नीतियों से स्पष्ट है, जिसे सख्ती से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि ट्रेड यूनियनें "सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण, आउटसोर्सिंग, ठेकाकरण और कार्यबल के आकस्मिकीकरण की नीतियों" के खिलाफ लड़ रही हैं।

बयान में कहा गया है कि संसद द्वारा पारित किए गए चार श्रम कोड ट्रेड यूनियन आंदोलन को दबाने और पंगु बनाने, काम के घंटे बढ़ाने, श्रमिकों के सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार, हड़ताल के अधिकार को छीनने और नियोक्ताओं द्वारा श्रम कानूनों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बनाने के लिए हैं। यूनियनों के नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने इस हड़ताल कार्रवाई को समर्थन दिया है और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी करने का फैसला किया है।

ट्रेड यूनियनों ने पहले 26 नवंबर, 2020 को, 28-29 मार्च, 2022 को और पिछले साल 16 फरवरी को इसी तरह की राष्ट्रव्यापी हड़तालें की थीं।

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