Highlights
- राहुल गांधी मानसून सत्र से पहले विदेश गए
- विदेश से वापसी 17 जुलाई (रविवार) को होगी
- संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा
Rahul Gandhi News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी मानसून सत्र से पहले विदेश चले गए हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों ने ये जानकारी दी है। उनकी विदेश से वापसी 17 जुलाई (रविवार) को होगी। बता दें कि संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा और ये 6 अगस्त को खत्म होगा। संसद के इसी सत्र में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव होगा। गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई और उपराष्ट्रपति चुनाव 6 अगस्त को होने वाला है।
मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी आज (मंगलवार) सुबह कतर एयरलाइन्स की फ्लाइट से विदेश गए हैं। हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि वह किस देश गए हैं और ये यात्रा निजी है या आधिकारिक है। बता दें कि देश में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जनता की नजर सभी राजनीतिक घटनाक्रमों पर लगी हुई है। एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनाई गई हैं, वहीं विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा मैदान में हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से अभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं हुआ है। चुनाव के नतीजे 21 जुलाई को घोषित होंगे।
राहुल ने हालही में महंगाई को लेकर कसा था केंद्र सरकार पर तंज
राहुल ने हालही में महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज में पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ने के साथ ही गब्बर सिंह टैक्स की लूट एवं बेरोजगारी की सुनामी आ गई है।
राहुल ने ट्वीट किया था, "प्रधानमंत्री ने कहा-133 करोड़ भारतीय हर बाधा से कह रहे हैं, दम है तो हमें रोको। BJP राज में एलपीजी सिलिंडर की कीमतें 157 प्रतिशत बढ़ी, रिकॉर्ड-तोड़ महंगा पेट्रोल, 'गब्बर सिंह टैक्स' की लूट और बेरोजगारी की सुनामी आई।" कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, "असल में जनता प्रधानमंत्री से कह रही है-आपकी बनाई इन बाधाओं ने दम निकाल दिया है, अब रुक जाओ।"
महंगाई और बेरोजगारी को लेकर राहुल करते रहते हैं हमला
राहुल अक्सर मंहगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र पर हमला करते रहते हैं। पिछले दिनों भी राहुल ने मंहगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार से तीखा सवाल किया था। राहुल ने कहा था कि देश में आर्थिक मंदी साफ नजर आ रही है, लेकिन नीतिगत दिवालियेपन की शिकार सरकार को यह नहीं दिख रहा और इसे लेकर सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।