Highlights
- सरदार पटेल ने सरकारी गाड़ी को सिर्फ सरकारी कामों तक सीमित रखने का सिद्धांत अपनाया था।
- दिल्ली घूमने आए परिचित के लिए सरदार पटेल ने सरकारी गाड़ी के बजाय निजी टैक्सी मंगवाई।
- रिश्तेदार भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री मोदी और सरदार पटेल की समान सोच का जिक्र किया।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के रिश्तेदार भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने उनसे जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जो आज भी ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में सादगी की मिसाल है। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कभी निजी काम के लिए नहीं करते थे, और एक बार सरकारी गाड़ी होने के बावजूद अपने एक जानने वाले को कहीं भेजने के लिए टैक्सी मंगवाई थी। उनका मानना था कि सरकारी गाड़ी और जनता के पैसे का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी कामों के लिए होना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा अनुभव भी किया साझा
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने 'मोदी स्टोरी' पर जारी एक वीडियो में यह किस्सा साझा किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा अपना अनुभव भी बताया। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी का एक कार्यक्रम था, तब उन्होंने उनके परिवार से मुलाकात की थी। भूपेंद्र पटेल ने कहा,
'सच पूछिए तो हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि नरेंद्र भाई हमको याद करेंगे। लेकिन उन्होंने हम सबको बुलाया। छोटी-छोटी बातों का भी नरेंद्र भाई ने ख्याल रखा।'
सरदार पटेल को PM मोदी ने दिया बड़ा सम्मान
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक किसी ने उन्हें इतना बड़ा सम्मान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार पटेल के कामों और उनकी दूरदृष्टि से काफी प्रभावित हैं। उनके मुताबिक, सरदार पटेल में जिस तरह भविष्य को समझने और दूर की सोच रखने की क्षमता थी, वैसी ही दूरदृष्टि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में भी दिखाई देती है।
बारडोली सत्याग्रह से जुड़ा सुनाया पुराना किस्सा
भूपेंद्र पटेल ने बारडोली सत्याग्रह के दौरान सरदार पटेल के करीबी रहे एक व्यक्ति से जुड़ा पुराना प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार सरदार पटेल दिल्ली में अपनी सरकारी गाड़ी से कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी नजर उस व्यक्ति पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत ड्राइवर से गाड़ी रोकने को कहा। सरदार पटेल ने उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया और पूछा कि वह दिल्ली कैसे आया है। इस पर उसने बताया कि वह दिल्ली घूमने के लिए आया है। इसके बाद सरदार पटेल उसे अपने घर ले गए और 2 दिनों तक दिल्ली के अलग-अलग स्थानों की सैर कराई।
निजी काम के लिए टैक्सी मंगवाई, सरकारी गाड़ी नहीं दी
2 दिन दिल्ली घूमने के बाद जब उस व्यक्ति ने वापस जाने की इच्छा जताई तो सरदार पटेल ने उसके लिए एक निजी टैक्सी का इंतजाम कराया। यह देखकर उस व्यक्ति ने उनसे पूछा कि जब उनके पास अपनी गाड़ी है तो टैक्सी क्यों मंगवाई जा रही है? इस पर सरदार पटेल ने साफ कहा कि उनके पास जो गाड़ी है, वह सरकार की है। उसका इस्तेमाल केवल सरकारी काम के लिए किया जा सकता है। किसी निजी काम के लिए उस गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सरकारी पैसे का निजी इस्तेमाल नहीं करते थे पटेल
भूपेंद्र मनुभाई पटेल ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कभी भी अपने निजी कामों के लिए सरकारी धन का एक पैसा तक खर्च नहीं किया। उनके लिए जनता का पैसा और सरकारी संसाधन बेहद महत्वपूर्ण थे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच भी सार्वजनिक धन के निजी इस्तेमाल को लेकर सरदार पटेल जैसी ही है। बता दें कि सरदार पटेल के प्रेरक विचारों से आज भी लाखों लोग प्रेरणा लेते हैं।
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