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मैला साफ करने, सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को 30 लाख रुपये का मुआवजा दें- सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Subhash Kumar
 Published : Oct 28, 2026 10:29 pm IST,  Updated : Oct 28, 2026 10:36 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया है कि मैला साफ करने, सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश को सख्ती ले लागू किया जाना चाहिए।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI/ANI

सुप्रीम कोर्ट ने हाथों से मैला साफ करने और सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने के अपने आदेश को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में साफ तौर पर कहा कि उसके आदेशों का पालन नहीं करने वाले राज्यों और अधिकारियों के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। आइए जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में और क्या कुछ कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने की 15 राज्यों की रिपोर्ट की जांच

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 15 राज्यों की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट की जांच की। इन रिपोर्टों में मृत कर्मचारियों के परिवारों को मुआवजा देने, एफआईआर दर्ज करने और मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि कुछ मामलों में मुआवजा मंजूर किए जाने की जानकारी तो दी गई, लेकिन यह साफ नहीं था कि पैसा परिवारों को मिला भी है या नहीं। वहीं, कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज होने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित राज्यों को चार सप्ताह के भीतर नई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

निजी ठेकेदार या संस्थान को लेकर भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, राज्यों को बताना होगा कि परिवारों को मुआवजा मिला या नहीं, एफआईआर दर्ज हुई या नहीं और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी कर्मचारी की मौत निजी ठेकेदार या किसी निजी संस्थान के लिए काम करते समय होती है, तो राज्य अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ित परिवार को मुआवजे की रकम मिले। इसके बाद संबंधित राज्य जिम्मेदार पक्ष से यह रकम वसूल सकता है। आपको बता दें कि देश के कई हिस्सों से सेप्टिक टैंक में गए मजदूरों की मौत की खबरें लगातार सामने आते रहती हैं।

मुआवजे के मॉडल योजना पर भी विचार

कोर्ट ने सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों के लिए मुआवजे की एक मॉडल योजना पर भी विचार किया। यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से सलाह लेकर तैयार की गई है। इस प्रस्तावित योजना में सफाई के दौरान मौत या दिव्यांगता होने पर उसकी जानकारी दर्ज करना, एफआईआर दर्ज कराना, पीड़ित परिवार को कानूनी मदद देना और मुआवजे का पैसा समय पर पहुंचाने की व्यवस्था शामिल है। कोर्ट ने संबंधित राज्यों को अपनी कमियां दूर करने के लिए एक और मौका दिया है और चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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