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जापान से भारत लाई जाएं नेताजी की अस्थियां, सुभाष चंद्र बोस की बेटी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं; केंद्र सरकार को नोटिस जारी

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Khushbu Rawal
 Published : Aug 11, 2026 01:15 pm IST,  Updated : Aug 11, 2026 01:23 pm IST

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां जापान के रेंकोजी मंदिर से वापस भारत लाने की मांग ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी है। आज सुप्रीम कोर्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ की याचिका पर सुनवाई हुई।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां भारत लाने की मांग। Image Source : PTI

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ ने उनके पार्थिव अवशेष यानी अस्थियां जापान के टोक्यो स्थित रेनकोजी मंदिर से भारत लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी ने कहा कि यह ऐसा मामला है,जिसमें नेताजी की बेटी खुद कोर्ट आई हैं।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पहले केंद्र सरकार को जवाब देने दिया जाए। इसके बाद CJI ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

मार्च में भी आया था मामला

इससे पहले मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी के भतीजे के बेटे आशीष रे की ओर से दाखिल PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। उस समय CJI की बेंच ने कहा था कि नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ को खुद सामने आकर अपने नाम से याचिका दाखिल करनी चाहिए, क्योंकि वह उनकी कानूनी वारिस हैं। अब अनीता बोस फाफ ने खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की अस्थियों को भारत लाने की मांग की है।

'नेताजी को भारत की धरती पर अंतिम सम्मान मिलना चाहिए'

नेताजी की बेटी की मांग है कि जापान की राजधानी टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में रखे नेताजी के बताए जाने वाले अवशेषों को भारत लाया जाए। उनका कहना है कि नेताजी को भारत की धरती पर अंतिम सम्मान मिलना चाहिए। इस मांग को लेकर वह वर्षों से प्रयास करती रही हैं। बता दें कि नेताजी की अस्थियों को वापस लाने का मुद्दा उतना ही पुराना है, जितनी पुरानी उनकी कथित विमान दुर्घटना में निधन की घटना है। नेताजी की बेटी अनीता बोस जर्मनी में रहती हैं और लगातार अपने पिता की अस्थियां उनके वतन लाने की अपील करती रही हैं। 

पिछले साल नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर नेताजी के अवशेषों को भारत वापस लाने का अनुरोध किया था।  

कैसे हुई थी मौत?

ऐसी मान्यता है कि 18 अगस्त, 1945 को मौजूदा ताइवान में जापानी मिलिट्री के एक विमान हादसे में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन हो गया था और सितंबर 1945 से उनकी अस्थियां रेंकोजी स्थित बौद्ध मंदिर के एक सुरक्षित कलश में रखी हुई है। नेताजी की मौत को लेकर अभी तक जो जांच हुई हैं, उसका यह निष्कर्ष निकाला गया है कि विमान हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गए थे और एक जापानी मिलिट्री के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांसें ली थीं।

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