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क्या है 'ब्लड मनी', यमन में केरल की नर्स निमिषा प्रिया को कैसे फांसी की सजा से बचाया जा सकता है? जानिए सबकुछ

 Published : Jul 14, 2025 05:07 pm IST,  Updated : Jul 14, 2025 05:46 pm IST

केरल की नर्स निमिषा प्रिया को साल 2017 में एक स्थानीय व्यक्ति की हत्या के लिए यमन में मौत की सजा सुनाई गई है। बशर्ते शरिया कानून के तहत अंतिम समय में 'ब्लड मनी' से किया गया समझौता उसकी फांसी की सजा को रोक सकता है। निमिषा प्रिया की जान बचाई जा सकती है।

निमिषा प्रिया का मामला- India TV Hindi
निमिषा प्रिया का मामला Image Source : INDIA TV GFX

यमन के जेल अधिकारियों के अनुसार, एक यमन नागरिक की हत्या की दोषी केरल की नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को सना केंद्रीय कारागार में फांसी दी जानी है। समय कम होता जा रहा है और उसके परिवार और समर्थक 'ब्लड मनी' (दिया, Diyya) के जरिए माफी पाने की आखिरी कोशिश कर रहे हैं। यह इस्लामी शरिया कानून का एक प्रावधान है। इसके तहत पीड़ित परिवार आर्थिक मुआवजे के बदले अपराधियों को माफ कर सकते हैं। 

भारत का सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट 18 जुलाई को इस मामले की फिर से सुनवाई करने वाला है, लेकिन केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि यमन के हूती अधिकारियों पर उसका कोई कूटनीतिक प्रभाव नहीं है। उसकी जान बचाने का एकमात्र रास्ता ब्लड मनी ही है।

निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा क्यों दी गई?

केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोडे की रहने वाली निमिषा प्रिया साल 2008 में नर्स के तौर पर काम करने के लिए यमन चली गईं। साल 2015 में उन्होंने यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर सना में एक निजी क्लिनिक खोला, क्योंकि स्थानीय कानूनों के अनुसार विदेशी व्यवसायों को यमन के नाम से पंजीकृत होना जरूरी है।

उसके परिवार का आरोप है कि महदी ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया और क्लिनिक की आय हड़प ली। साल 2017 में अपने दस्तावेज वापस पाने के लिए उसने कथित तौर पर महदी को बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। यह खुराक जानलेवा साबित हुई और बाद में महदी का क्षत-विक्षत शरीर एक पानी की टंकी में मिला। 

प्रिया को सऊदी-यमन सीमा के पास भागने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया था। यमनी ट्रायल कोर्ट ने साल 2020 में उसे मौत की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में सजा बरकरार रखी, लेकिन शरिया कानून के तहत ब्लड मनी से समझौता करने का विकल्प खुला रखा।

शरिया कानून के तहत ब्लड मनी क्या है?

ब्लड मनी या 'दिया' इस्लामी शरिया कानून पर आधारित एक व्यवस्था है, जो अपराधियों को पीड़ित के परिवार से आर्थिक मुआवजे के बदले माफी मांगने की अनुमति देती है। यह प्रथा यमन सहित कई इस्लामी देशों में प्रचलित है।

कुरान (सूरह अल-बक़रा 2:178, अन-निसा 4:92) में इस व्यवस्था का प्रावधान है, जिसके तहत पीड़ित के परिवार को या तो बदला लेने या आर्थिक मुआवजा स्वीकार करने का अधिकार है। अगर यह अधिकार स्वीकार कर लिया जाता है, तो अपराधी को मृत्युदंड से बचाया जा सकता है।

शरिया कानून के तहत दीये की कोई निश्चित राशि नहीं है। यह पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ बातचीत पर निर्भर करता है। इस मामले में निमिषा के परिवार और समर्थकों ने कथित तौर पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 8.6 करोड़) की पेशकश की है। हालांकि, खबरों के अनुसार, महदी के परिवार ने अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

यह मामला इतना जटिल क्यों है?

यमन के हूती नेतृत्व वाले अधिकारियों के साथ भारत के राजनयिक संबंधों की कमी किसी भी औपचारिक हस्तक्षेप को गंभीर रूप से प्रतिबंधित करती है। केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि मध्यस्थों और मानवीय माध्यमों से सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद राहत प्रदान करने के लिए कोई राजनयिक मार्ग नहीं है।

सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल, कार्यकर्ताओं, वकीलों और निर्वाचित प्रतिनिधियों का एक समूह, उसे बचाने के प्रयासों का समन्वय कर रहा है। निमिषा की मां, प्रेमकुमारी, अप्रैल 2024 से यमन में हैं और पीड़ित परिवार से सीधे बातचीत करने की कोशिश कर रही हैं।

धन जुटाने और दीया चढ़ाने के बावजूद, कोई सफलता नहीं मिली है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई बार पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है, लेकिन केंद्र ने अपनी कानूनी और कूटनीतिक सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं।

फांसी की तारीख भारत की सुनवाई से पहले क्यों?

16 जुलाई की फांसी की तारीख यमन के जेल अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बातचीत से तय हुई थी, न कि किसी औपचारिक राजनयिक अधिसूचना के ज़रिए। 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी, लेकिन यमन की न्यायपालिका भारत के कानूनी कैलेंडर के आधार पर फांसी टालने के लिए बाध्य नहीं है। जब तक अचानक कोई उलटफेर न हो, प्रिया की फांसी भारत की सुनवाई के बावजूद जारी रह सकती है।

पूर्व में भारतीयों के लिए ब्लड मनी कैसे काम आया?

ऐसे कई उदाहरण हैं जब भारतीय नागरिक ब्लड मनी के समझौते के जरिए फांसी से बच गए। हालांकि, ये मामले ऐसे देशों से जुड़े थे जिनके भारत के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध थे, जो यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण अंतर है।

  • साल 2019 में तमिलनाडु के अर्जुनन अथिमुथु ने 30 लाख का भुगतान करने के बाद कुवैत में फांसी को टाल दिया।
  • संयुक्त अरब अमीरात (2017) में दस भारतीयों को 200,000 दिरहम का भुगतान करने के बाद माफ कर दिया गया था।
  • सऊदी अरब में (2006 में) एक भारतीय ने फांसी से बचने के लिए कथित तौर पर 34 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

 

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