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जब संघ की शाखा में आए थे डॉ अंबेडकर, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सुनाया पूरा किस्सा

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Subhash Kumar
 Published : Apr 14, 2025 06:45 pm IST,  Updated : Apr 14, 2025 09:35 pm IST

मोहन भागवत ने बताया है कि 1934 में डॉ अंबेडकर महाराष्ट्र के कराड की एक संघ कि शाखा में आए थे। वहां पर उन्होंने कहा कि, कुछ बातों में हमारे मतभेद है, तो भी संघ को अपनत्व की भाव से में देखता हूं।

मोहन भागवत ने बताया डॉ अंबेडकर से जुड़ा किस्सा।- India TV Hindi
मोहन भागवत ने बताया डॉ अंबेडकर से जुड़ा किस्सा। Image Source : PTI

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। यहां कानपुर में उन्होंने नए कार्यालय का उद्घाटन किया। मोहन भागवत ने हिंदू समाज, भारतवर्ष समेत कई मुद्दों पर बात की। मोहन भागवत ने डॉ बीआर अंबेडकर से जुड़ा एक किस्सा भी बताया जब  बीआर अंबेडकर संघ कि शाखा में आए थे। आइए जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में।

कानपुर में क्या बोले डॉक्टर मोहन भागवत?

संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- "भारतवर्ष अपना परंपरा से हिंदू समाज का घर है। इसलिए हिंदू समाज उसके लिए उत्तरदाई है। जो अपने आप को हिंदू कहता है, उनको इस देश के भले बुरे के बारे में पूछा जाएगा, जवाबदेही, उनकी बनती है। उस हिंदू समाज को तैयार होना चाहिए। उन्होंने कानपुर में नए कार्यालय के उद्घाटन के दौरान कहा कि आज उत्सव का वातावरण है। बहुत बार इस स्थान पर आया हूं, इतनी भीड़ नहीं देखी। संघ का काम केवल संघ का काम नहीं है। वास्तव में वो समाज का काम है। पूरे समाज को यह काम करना चाहिए। अपने स्वयं के लिए और अपने देश के लिए, संघ का काम सबको जोड़ने का है। संघ एक जीवन है संघ एक वातावरण है।

जब संघ की शाखा में आए बीआर अंबेडकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कानपुर में ये भी बताया कि डॉ अंबेडकर एक बार संघ की शाखा में आए थे। भागवत ने कहा- "आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ एक स्टार्टर था। बाबा साहब का काम भी एक स्टार्टर था। संघ चाबी घूमने वाला स्टार्टर था तो बाबा साहब का किक वाला स्टार्टर था, क्योंकि हिंदू समाज सुन रहा रहा था। हिंदू समाज को इस विषमता से बाहर लाने के लिए उन्होंने पूरा जीवन व्यतीत किया, दीक्षा परिवर्तन भी किया। 1934 में डॉ अंबेडकर महाराष्ट्र के कराड की एक संघ की शाखा में आए थे। डॉ बाबासाहेब अंबेडकर संघ की शाखा में आए थे तो, उसका समाचार केसरी में छपा था। केसरी समाचार पत्र में तीन पंक्तियों में उनका वृतांत छपा था, जिसमें डॉक्टर अंबेडकर का शाखा पर जो भाषण हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ बातों में हमारे मतभेद हैं, तो भी संघ को अपनत्व की भाव से में देखता हूं।"

भारतवर्ष हिंदू समाज का घर- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा- "अपने समाज में पिछले 2000 वर्षों से जो आत्मा विशमृति आई, उसके कारण हम आपसी स्वार्थ में उलझ गये, भेद पैदा हुआ, भेद कि खाई चौड़ी होती गई। हम अपने कर्तव्य से विमुख हो गए, जिसका लाभ विदेशी आक्रांताओं ने लिया, हमको पीटा, लूटा। यह बात चलती चली आई, इसलिए काम पूर्णत: बंद हो गया ,जो काम पूर्णत: बंद हो गया था, उसको समाज फिर से शुरू करें। पहले प्रारंभ करना पड़ता है। प्रारंभ करने वाले अलग दिखाई पड़ते हैं, क्योंकि जो बाकी समाज नहीं करता है, वह लोग करते हैं। इसलिए शुरू में काम उनका माना जाता है, जो कर रहे हैं। यह काम है हिंदू संगठन का काम, भारतवर्ष अपनी परंपरा से हिंदू समाज का घर है। इसलिए हिंदू समाज उसके लिए उत्तरदाई है। जो अपने आप को हिंदू कहता है, उनको इस देश के भले बुरे के बारे में पूछा जाएगा, जवाबदेही उनकी बनती है। उस हिंदू समाज को तैयार होना चाहिए। क्योंकि भारतवर्ष उनके मातृभूमि है। वो भारत माता के भक्ति करते हैं, उस भारतवर्ष में अखंड परंपरा है, ऋषियों की, ब्रह्मर्षियों की, उस परंपरा के अपने आप को वंशज कहलाते हैं। इस भारतवर्ष के भाग्य उदय पर उनका भाग्य उदय निर्भर है। भारत देश की दुनिया में प्रतिष्ठित हो रहा है, सुरक्षित हो रहा है, विश्व भर के हिंदुओं की प्रतिष्ठा और सुरक्षा बढ़ रही है। ऐसा नहीं था विश्व भर के हिंदू सुरक्षित नहीं थे, प्रतिष्ठित नहीं थे। इसलिए हिंदू समाज का काम है भारतवर्ष के लिए अपने आप को ऐसा बनाना।"

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