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क्या एलन मस्क की टेस्ला की तरह अब ट्विटर पर भी कम 'प्रदूषण' होगा!

 Published : Apr 26, 2022 10:43 pm IST,  Updated : Apr 26, 2022 10:43 pm IST

ऐसा नहीं है कि ट्विटर पर अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर पहले कदम उठाए नहीं गए थे।

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Elon Musk. Image Source : AP FILE

Highlights

  • इलेक्ट्रिक कारें बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला के CEO मस्क ने 14 अप्रैल को ट्विटर को खरीदने की पेशकश की थी।
  • मस्क ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि ट्विटर स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मंच के रूप में अपनी क्षमता पर खरा उतर पा रहा है।

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) को करीब 44 अरब डॉलर में खरीद लिया है। इलेक्ट्रिक कारें बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला (Tesla) के CEO मस्क ने 14 अप्रैल को ट्विटर को खरीदने की पेशकश की थी। इसके साथ ही यह बहस शुरू हो गई है कि जिस तरह Tesla की कारें पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने में अहम योगदान देती हैं, क्या Twitter पर भी लोगों को ‘वैचारिक प्रदूषण’ से मुक्ति मिल पाएगी। दरअसल, मस्क ने कहा था कि वह ट्विटर को इसलिए खरीदना चाहते है, क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि यह स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मंच के रूप में अपनी क्षमता पर खरा उतर पा रहा है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कैसा रहा है ट्विटर का काम

वैसे भविष्य की तरफ देखने से पहले इतिहास पर एक नजर डालना जरूरी होता है। इससे हमें यह अंदाजा लगाने में थोड़ी सहूलियत मिल जाती है कि आगे क्या संभावनाएं बन सकती हैं। ऐसा नहीं है कि ट्विटर पर अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर पहले कदम उठाए नहीं गए थे, लेकिन तब इस सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म को कोई खास सफलता नहीं मिली थी। ट्विटर ने कई बार ‘सीमाएं’ लांघने के लिए यूजर्स पर ऐक्शन लिया, लेकिन उस पर किसी खास विचारधारा को प्रश्रय देने या उसकी तरफ झुकाव रखने के भी आरोप लगे।

ट्विटर के एक पदाधिकारी ने एक दशक पहले अभिव्यक्ति की अदम्य स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कंपनी को ‘बोलने की आजादी वाली पार्टी की बोलने की आजादी वाली शाखा’ करार दिया था। लेकिन बाद के घटनाक्रमों से ‘बोलने की आजादी’ वाले दावे को लेकर परीक्षा की घड़ी आ गयी जब दमनकारी शासकों ने ट्विटर के उपयोगकर्ताओं पर कार्रवाई शुरू की और खासतौर पर ‘अरब स्प्रिंग’ के मद्देनजर ऐसे मामले सामने आये। अमेरिका में 2014 में पत्रकार अमांडा हेस के एक विचारोत्तेजक लेख ने ट्विटर या अन्य ऑनलाइन मंचों पर पोस्ट डालने मात्र के लिए अनेक महिलाओं पर हुए उत्पीड़न को उजागर किया गया।

साल दर साल ट्विटर ने व्यापक रूप से एक अनियंत्रित सामाजिक मंच को चलाने के परिणामों को लेकर कुछ चीजें समझीं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण थी कि कपंनियां आमतौर पर हिंसक धमकियों, हेट स्पीच जैसे कंटेंट के साथ अपने विज्ञापन नहीं चलाना चाहतीं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स में उपनिदेशक पॉल बारेट ने कहा, ‘यदि आप ऑटोमैटिक सिस्टम और मानवीय समीक्षाओं पर नियंत्रण बंद कर देंगे तो ट्विटर जैसी साइट बहुत कम समय में कूड़ाघर हो जाएगी।’ बारेट ने बताया कि किस तरह गूगल ने इस बात को बहुत जल्द समझ लिया था जब टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियों ने 2015 में उग्रवादियों के यूट्यूब वीडियो से पहले अपने विज्ञापन चलाये जाने पर उन्हें वापस ले लिया था।

ट्विटर को साफ-सुथरी जगह बनाने में डोर्सी ने की थी मेहनत
ट्विटर के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ जैक डॉर्सी ने भी इस मंच पर विचारों के आदान-प्रदान को सुधारने के लिए सालों काम किया था। बता दें कि मस्क द्वारा ट्विटर को खरीदने के बाद कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल ने चिंतित कर्मचारियों से कहा था कि उन्हें नहीं पता कि 44 अरब डॉलर के बड़े सौदे के बाद यह कंपनी किस दिशा में जाएगी। पराग की बातों से ऐसा लग रहा था कि वह कंपनी के भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं। अग्रवाल ने कहा था कि यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि जो हो रहा है, उसके बारे में आप सभी की अलग-अलग भावनाएं हैं।

अग्रवाल ने कर्मचारियों से कहा कि उनका अनुमान है कि सौदे को पूरा होने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं और इसबीच हम पहले की तरह ही ट्विटर का संचालन करते रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम कंपनी कैसे चलाते हैं, हम जो निर्णय लेते हैं, और जो सकारात्मक बदलाव हम करते हैं, वह हमारे ऊपर निर्भर करेगा और हमारे नियंत्रण में होगा।’ 

ट्विटर में हो सकते हैं कई बदलाव, लेकिन क्या ये इतना आसान होगा?
फ्री स्पीच को लेकर एलन मस्क काफी समय से बात करते आए हैं, इसीलिए लोगों को लग रहा है कि इस सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर जल्द ही कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि ट्विटर के एल्गोरिद्म को ओपन सोर्स करने से लेकर एडिट बटन तक का ऐलान जल्द ही किया जा सकता है। साथ ही ट्विटर के उन बड़े अकाउंट्स को वापस ऐक्टिव किया जा सकता है, जिन्हें बैन कर दिया गया है। हालांकि इन सबके बीच मस्क के सामने चुनैतियां भी कम नहीं होंगी।

मस्क के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की ‘सीमा’ तय करने की होगी, क्योंकि यह तय करने के लिए कि कोई विशेष ट्वीट, वीडियो, ऑडियो या तस्वीर किस तरह सार्वभौमिक तौर पर ‘सही’ हो, बेहद मुश्किल काम होगा। इन तमाम अनिश्चितताओं के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि खुद को स्वतंत्र भाषण का हिमायती बताने वाले मस्क इस दिशा में कितना काम कर पाते हैं और क्या उनके ऐसा करने पर उपयोगकर्ता और विज्ञापनदाता उनके साथ बने रहेंगे।

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