नई दिल्ली: चुनाव आयोग ईवीएम की विश्वसनीयता पर बहस के बीच इस मुद्दे पर अपना रूख बताने के लिए आज विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधियों से मिलेगा। आयोग ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर चर्चा करने के लिए सात राष्ट्रीय पार्टियों और 48 राज्य स्तरीय पार्टियों की बैठक बुलाई है। गौरतलब है कि ईवीएम में लोगों का विश्वास खत्म हो जाने का दावा करते हुए 16 पार्टियों ने आयोग से मतपत्र के जरिए चुनाव कराने की व्यवस्था की ओर लौटने का अनुरोध किया था। आयोग के ईवीएम हैकिंग चुनौती की अपनी योजना के बारे में पार्टियों को जानकारी देने की संभावना है। (ये भी पढ़ें: बंद होंगे 2000 के नोट, मोदी सरकार फिर करेगी नोटबंदी?)
प्रस्तावित बैठक से कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में एक वोटिंग मशीन की हैकिंग को प्रदर्शित किया था। पार्टी ने इस प्रदर्शन के लिए ईवीएम के एक प्रारूप का इस्तेमाल किया था। हालांकि, चुनाव आयोग ने आप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह ईवीएम जैसा दिखता है लेकिन वह चुनाव आयोग का ईवीएम नहीं है। सर्वदलीय बैठक के बाद प्रस्तावित चुनौती की तारीख के बारे में फैसला किया जाएगा।
आज होने वाली बैठक में आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधायक सौरभ भारद्वाज करेंगे। आप कह चुकी है कि वह महज 90 सेकेंड के भीतर ईवीएम को हैक कर दिखा सकती है। भारद्वाज ने गुरुवार को बताया कि आखिर वह चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में एक संयुक्त समिति बनाने की मांग करेंगे, जिसमें सभी पार्टी के प्रतिनिधि, चुनाव आयोग के विशेषज्ञ और तकनीकि विशेषज्ञ शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि हमारी टीम इस समिति के सामने यह दिखा सकती है कि कैसे चुनावों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किया गया था।
आज ही चुनाव आयोग पार्टियों के सामने दो ऐसे प्रस्ताव भी रखने जा रहा है जिस पर अगर सहमति बन गई तो देश में चुनाव की पूरी तस्वीर ही बदल सकती है। चुनाव आयोग वोट को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के अपराध को संज्ञेय अपराध बनाने की मांग करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि पुलिस रिश्वत देने के आरोप में किसी को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है। चुनाव आयोग ये भी मांग करेगा कि बड़े पैमाने पर रिश्वत की शिकायत आने पर किसी सीट पर चुनाव रद्द करने का अधिकार भी उसे मिले। फिलहाल सिर्फ बूथ लुटे जाने पर चुनाव आयोग को चुनाव रद्द करने का अधिकार उसके पास है।
दूसरी मांग में चुनाव आयोग यह प्रस्ताव रखेगा कि अदालत द्वारा आरोप तय कर दिए जाने के बाद ही किसी नेता के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग जाए। मौजूदा कानून के हिसाब से किसी नेता के चुनाव लड़ने पर तभी पाबंदी लगती है जब अदालत उसे दोषी घोषित कर दे। चुनाव आयोग का मानना है कि अगर आरोप तय होने के बाद ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग जाए तो चुनाव काफी साफ सुथरा हो जाएगा क्योंकि कई बार मुकदमा लंबा खिंचने का फायदा अपराधिक छवि वाले नेता लंबे समय तक उठाते रहते हैं।
अगले स्लाइड में क्या सौरभ भारद्वाज ने Amazon से खरीदा था EVM?