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... तो टूट गई समाजवादी पार्टी ! बड़ा सवाल 'सपा' किसकी ?

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 30, 2016 07:23 pm IST,  Updated : Dec 30, 2016 07:45 pm IST

अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर करने के साथ ही समाजवादी पार्टी अंतत: टूट गई। रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव ने आज यह फैसला किया था कि 1 जनवरी को पार्टी प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाया जाएगा।

Samajwadi party- India TV Hindi
Samajwadi party

लखनऊ: अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर करने के साथ ही समाजवादी पार्टी अंतत: टूट गई। रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव ने आज यह फैसला किया था कि 1 जनवरी को पार्टी प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाया जाएगा। इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इन दोनों को पार्टी से बाहर करने का ऐलान कर दिया। 

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पार्टी पर किसका होगा अधिकार?

बदली हुई स्थिति में अब सबसे बड़ा झगड़ा इस बात को लेकर होगा कि समाजवादी पार्टी पर किसका अधिकार होगा? मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के पास समाजवादी पार्टी की रहेगी या फिर अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव के पास। ऐसे में यह संभावना है कि मामला चुनाव आयोग में जाएगा। जानकारों की मानें तो चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों के बीच काफी तकरार की संभावना है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग इन दोनों को नए चुनाव चिन्ह आवंटित कर सकता है। 

अखिलेश कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं?

पार्टी से निकाले जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि अखिलेश मुख्यमंत्री बने रहेंगे या नहीं? ऐसी स्थिति में अखिलेश का सीएम पद पर बने रहना विधायक दल की बैठक पर निर्भर करता है। माना जा रहा है कि अखिलेश को विधायकों का पूरा समर्थन प्राप्त है। ऐसी स्थिति में वे सीएम बने रह सकते हैं।

प्रतिनिधि सम्मेलन में नए धड़े के अध्यक्ष का ऐलान

1 जनवरी को रामगोपाल यादव की तरफ से बुलाई गई प्रतिनिधि सम्मेलन में नए धड़े के अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है। माना जा रहा है इस बैठक में समाजवादी पार्टी के दूसरे धड़े का गठन हो सकता है। 

पढ़ें: मुलायम का बड़ा फैसला, अखिलेश यादव 6 साल के लिए समाजवादी पार्टी से निकाले गए

निष्कासन पूरी तरह से असंवैधानिक: रामगोपाल

​रामगोपाल यादव ने कहा कि यह निष्कासन पूरी तरह से असंवैधानिक है। नोटिस देने के आधे घंटे के अंदर निकाला गया। जवाब लिए बिना हमलोगों को पार्टी से निकाला गया। जवाब लिए बिना बड़े से बड़े अपराधी पर भी कार्रवाई नहीं की जाती है। इसलिए यह पूरी तरह से असंवैधानिक है। पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से प्रतिनिधि सम्मेलन की मांग की जा रही थी। 

 

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