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कैशलेस नहीं ‘लेस कैश’ अर्थव्यवस्था पर है सरकार का जोर: अमित शाह

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 17, 2016 07:53 pm IST,  Updated : Dec 17, 2016 07:53 pm IST

अमित शाह ने कहा है कि सरकार का जोर ‘लेस कैश’ अर्थव्यवस्था पर है न कि ‘कैशलेस’ अर्थव्यवस्था पर। उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि कैश के इस्तेमाल को खत्म कर दिया जाएगा।

Amit Shah in Aap Ki Adalat- India TV Hindi
Amit Shah in Aap Ki Adalat

नई दिल्ली: अमित शाह ने कहा है कि सरकार का जोर ‘लेस कैश’ अर्थव्यवस्था पर है न कि ‘कैशलेस’ अर्थव्यवस्था पर। उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि कैश के इस्तेमाल को खत्म कर दिया जाएगा। यह एक भ्रांति है जो कुछ लोगों के द्वारा फैलाई जा रही है। हम लेस कैश इकॉनमी चाहते हैं, जहां ईमानदार टैक्सपेयर्स और गरीब लोगों को लाभ हो, क्योंकि जब लोग सामान की खरीदारी कैश में करते हैं, तो टैक्स किसी और की जेब में चला जाता है, सरकार के पास नहीं जाता।’

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इंडिया टीवी का कार्यक्रम 'आप की अदालत' में शाह ने कहा, ‘एक ऐसे देश में जहां 100 करोड़ सेलफोन यूजर्स हैं, मुझे पूरा यकीन है कि कैश लेस इकॉनमी के लिए की जा रही हमारी कोशिश टैक्स चोरी के लिए कोई भी स्कोप छोड़ेगी। जिन गांवों में इंटरनेट नहीं है, वहां सरकार युद्ध स्तर पर ई-वॉलेट योजना लागू करने की कोशिश कर रही है, पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीनों को बड़ी संख्या में इंस्टॉल किया जा रहा है, कनेक्टिविटी की सुविधा बढ़ाई जा रही है, 25 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड्स जारी किए जा चुके हैं। एक लेस कैश इकॉनमी निश्चित रूप से काले धन की परिपाटी को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।’

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 बीजेपी अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग के ऐसे किसी भी कदम का स्वागत करेगी जिसमें चुनावी फंडिंग को आरटीआई (सूचना का अधिकार) के दायरे में लाने की बात की जाएगी। ‘मोदीजी ने पहले ही सारे राजनीतिक दलों से चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की है। लेकिन राजनीतिक दलों के सभी क्रियाकलापों को आरटीआई के दायरे में लाना गलत होगा। आरटीआई के अंतर्गत किसी को इस प्रकार की जानकारी की आशा नहीं करनी चाहिए कि मैं कितने लोगों से मिला, या कितने लोगों को चाय पिलाई गई। हमारा कोई सरकारी विभाग नहीं है, यह एक राजनीतिक दल है।’

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