इंफाल: केंद्र ने मणिपुर सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि एक नगा समूह के 52 दिन के आर्थिक नाकेबंदी से पैदा हुए मानवीय संकट की जिम्मेदारी से राज्य सरकार भाग नहीं सकती है। केंद्र ने साथ ही स्पष्ट किया कि किसी को राजनीतिक लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। केंद्र के दूत के तौर पर एक दिन की मणिपुर यात्रा पर गये गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इस तरह की नाकेबंदी पूरी तरह अस्वीकार्य है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसे समाप्त करने के लिए केंद्र और मणिपुर सरकार एकसाथ मिलकर कार्य करेंगी।
देश-दुनिया की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
रिजिजू ने इंफाल में कहा, ‘राज्य सरकार नाकेबंदी को खत्म नहीं कर पाई है। यह जल्द से जल्द खत्म होनी चाहिए क्योंकि कानून और व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है। किसी को भी इस मानवीय संकट से राजनीतिक लाभ नहीं लेने दिया जाएगा, जब आम लोग परेशान हो रहे हैं।’ इससे पहले रिजिजू ने संकट और इसके समाधान के उपायों पर विचार के लिए मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह और केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। गृह राज्य मंत्री ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि केंद्र ने कार्रवाई में देरी की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शुरआत से ही राज्य सरकार से नाकेबंदी खत्म करने के लिए कहती रही है और मदद की पेशकश करती रही है।
उन्होंने कहा, ‘आज से राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती है। किसी को भी लोगों की परेशानियों को बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। केंद्र सरकार भी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट रही है।’ 7 नए जिले बनाए जाने का विरोध करते हुए यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) एक नवंबर से मणिपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग- 2 और 37 की नाकेबंदी कर रहा है। इसके चलते पिछले 52 दिन से मणिपुर में जनजीवन बाधित है। बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार मणिपुर की कांग्रेस सरकार से दोनों राजमार्गों पर यातायात के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने का दबाव डाल रही है। रिजिजू ने कहा कि मणिपुर सरकार के तहत पहले ही 15,000 अर्धसैनिक कर्मचारी हैं जबकि 700 और भेजे जा रहे हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव अगले साल के शुरू में होने हैं।