नयी दिल्ली: लोकसभा में आज सत्तारूढ़ भाजपा ने संसद में कामकाज में व्यवधान पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तल्ख टिप्पणी का हवाला देते हुए विपक्ष से कार्यवाही में रुकावट डालने के लिए माफी मांगने की मांग की। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी के कारण सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी।
सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल हंगामे की भेंट चढ़ गये।
संसद में कामकाज में व्यवधान के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्षी के बीच तनातनी के कारण लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की बैठक सुबह शुरू होने के कुछ ही देर बाद आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी थी।
साढे ग्यारह बजे संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि हम अभी चर्चा के लिए तैयार हैं। विपक्ष की ओर से पिछले 16 दिनों से व्यवधान डाला जा रहा है, सदन में कामकाज को बाधित किया जा रहा है। राष्ट्रपति जी ने भी कहा है कि यह तरीका ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदल सदन के कामकाज में व्यवधान डाल रहे हैं। इस तरह से व्यवधान डालने के लिए विपक्ष देश की जनता से माफी मांगे।
कुमार ने कहा, पहले वे देश की जनता से माफी मांगें। देश की जनता का पैसा बर्बाद क्यों किया, वे (विपक्ष) बतायें।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के सदस्य अपने स्थान से कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन हंगामे में उनकी बात नहीं सुनी जा सकी। शोरशराबा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 11 बजकर 35 मिनट पर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन भाजपा सदस्यों ने कहा कि राष्ट्रपति ने सदन में व्यवधान को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। विपक्ष की ओर से व्यवधान डालना ठीक नहीं है।
अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि दोनांे ओर से शोर शराबे में वे किसी की बात नहीं सुन पायेंगी। इसलिए शांत रहें। लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी बात कहते रहे।
दोपहर 12 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर भी स्थिति जस की तस रही। विपक्षी सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने शोर-शराबे के बीच ही आवश्यक कागज सदन के पटल पर रखवाए।
हंगामे के बीच ही मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विग्यान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान :दूसरा संशोधन: विधेयक, 2016 सदन में रखा।
इस दौरान जब सत्तापक्ष के सदस्य पहले की तरह उठकर विपक्षी सदस्यों का विरोध कर रहे थे तो भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को नाराजगी दिखाते हुए और सत्तापक्ष के सदस्यों को बैठने का इशारा करते हुए देखा गया। इसके बाद भाजपा के सदस्य अपनी जगहों पर बैठ गये।
गौरतलब है कि आडवाणी ने दो दिन पहले भी सदन मंे कामकाज नहीं होने पर बैठक स्थगित होने के बाद नाराजगी जताई थी और उन्हें यह कहते सुना गया था कि न तो स्पीकर और न ही संसदीय कार्य मंत्री सदन को चला पा रहे हैं।
अध्यक्ष ने शून्यकाल शुरू करने का प्रयास किया लेकिन हंगामा नहीं थमा और उन्होंने सदन की बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। उल्लेखनीय है कि संसद में जारी गतिरोध के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कल एक कार्यक्रम में कहा था कि सदन धरना प्रदर्शन और ऐसी बाधा पैदा करने की जगह नहीं है जिसमें अल्पमत द्वारा बहुमत की आवाज दबा दी जाए।
प्रणब ने कहा था कि विपक्ष का काम सदन को बाधित करना नहीं, बल्कि चर्चा और कामकाज करना है।