लखनऊ : केंद्र सरकार की 'सांसद आदर्श ग्राम योजना' के तहत उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज सांसदों ने गांव गोद लिए हैं, मगर एक साल बीत जाने के बावजूद बुनियादी स्तर पर बदलाव की शुरुआत नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर, 2014 को लोकनायक जयप्रकाश के जन्मदिन पर सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इस योजना में गांवों को विकसित करने का कार्य अतिरिक्त धन के बजाय सांसद निधि से ही करने का प्रावधान किया गया है। यह योजना अब महज मजाक लगने लगी है।
कांग्रेस, एसपी और बीएसपी जैसे मुख्य दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी यूपी के गांव गोद लिए हैं, मगर इन गांवों के निवासी खुद को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का आलम यह है कि सूबे के करीब 65 फीसदी सांसदों ने अभी तक अपने सांसद निधि का एक भी पैसा विकास कार्यों में नहीं लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तो अपने गोद लिए गांव को देखा तक नहीं है।
योजना शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया था। इसके बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के तमोली गांव को गोद लिया। एसपी चीफ मायावती ने भी लखनऊ के माल गांव को गोद लिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी राणा बेनी माधव बख्श सिंह के पैतृक गांव उड़वा को चुना है, जबकि उनके बेटे और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी के जगदीशपुर ब्लॉक के डीह गांव को गोद लिया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और एसपी सांसद डिंपल यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र इत्र नगरी कन्नौज के सैयदपुर सकरी गांव को गोद लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ के बेंती को और बॉलीवुड स्टार हेमा मालिनी ने अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा के रावल गांव को गोद लिया है।
उत्तर प्रदेश में आदर्श गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोद लिए गए जयापुर गांव में बदलाव की शुरुआत हुई है। छह माह पहले तक जयापुर गांव वाराणसी-इलाहाबाद हाइवे के पास होते हुए भी अनजान था। योजना की शुरुआत के बाद से ही यहां डाकघर, बैंक और कई मकानों का निर्माण हो चुका है।
कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गांधी ने जब उड़वा गांव को गोद लिया, तो लोगों की इससे काफी उम्मीदें जुड़ गई थीं। मगर ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि सांसद ने गांव को गोद तो ले