चेन्नई: अन्नाद्रमुक की सबसे करिश्माई नेता के निधन के बाद पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जयललिता के बाद अब दल का प्रमुख कौन होगा और क्या वह उनकी करीबी सहयोगी शशिकला होंगी। पार्टी में दूसरी पंक्ति के नेतृत्व की गैर-मौजूदगी एवं दिवंगत नेता द्वारा किसी को उत्तराधिकारी के रूप में चिन्हित किये जाने के अभाव के कारण जयललिता की कमी को पूरा करना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होने वाला है।
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मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने आज शशिकला के साथ 2 घंटे तक चर्चा की, इससे कई तरह के संकेत मिल रहे हैं। जयललिता के निधन के बाद शशिकला को पार्टी में शक्ति का केंद्र माना जा रहा है। पार्टी में शशिकला समर्थकों का दावा है कि वह महासचिव पद की स्वाभाविक पसंद हैं।
गौरतलब है कि जयललिता भी पार्टी महासचिव ही थीं। वर्ष 1971 में पार्टी के गठन से लेकर वर्ष 1987 में अपनी मृत्यु तक उनके राजनीतिक गुर एमजीआर भी इसी पद पर रहे। शशिकला समर्थकों का कहना है कि वह करीब 30 वर्षों तक अम्मा की सहयोगी, बहन, सहेली और विश्वासपात्र रहीं। उन्होंने साथ ही बताया कि ओ पनीरसेल्वम के मुख्यमंत्री बनने के बाद वह इस पद की आदर्श पसंद हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने का आग्रह करते हुए बताया, इतिहास में झांकिए और खुद ही तय कीजिए कि क्या अम्मा के वफादार और लोग उन्हें (शशिकला को) स्वीकार करेंगे।
उन्होंने याद किया कि जयललिता ने शशिकला को दो बार पार्टी से निलंबित किया था। वर्ष 1996 में अन्नाद्रमुक को मिली शिकस्त के बाद और द्रमुक से सत्ता वापस लेने के बाद वर्ष 2011 में। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें उनके लिए बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।