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'एंटी पेपर लीक बिल' पर कल लोकसभा में होगी चर्चा, सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म

 Reported By: Devendra Parashar Written By: Niraj Kumar
 Published : Jul 27, 2026 05:59 pm IST,  Updated : Jul 27, 2026 08:07 pm IST

आखिरकार एंटी पेपर लीक बिल पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है और मंगलवार को इस पर चर्चा होगी। स्पीकर ओम बिरला की पहल पर यह सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

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ओम बिरला Image Source : PTI

नई दिल्ली: एंटी पेपर लीक बिल पर अंतत: सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म हो गया। इस बिल पर कल लोकसभा में चर्चा होगी। इससे पहले स्पीकर ओम बिरला ने पक्ष और विपक्ष से अपील की थी कि वे इस बिल पर सहमति बनाएं और गतिरोध को दूर करने का प्रयास करें।

सभी दलों ने चर्चा पर जताई सहमति

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल और सदन में लगातार बनाए गए संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आया। अब मंगलवार को संसद में लोक परीक्षा(अनुचित साधन निवारण)विधेयक,2026 पर चर्चा होगी। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा शुरू करने पर सहमति जताई है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने क्या अपील की थी?

सदन की कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से आग्रह किया था कि यह विषय देश के करोड़ों विद्यार्थियों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस पर व्यापक और सार्थक चर्चा होना उचित है।

सहमति और संवाद की भावना को मिला बल

अध्यक्ष की इस सकारात्मक पहल के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से लोकसभा अध्यक्ष ने स्वयं बातचीत की। इसका नतीजा ये हुआ कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सहमति बनाते हुए मंगलवार को इस बिल पर विस्तृत चर्चा कराने का निर्णय लिया। माना जा रहा है कि इस प्रयास से सदन में सहमति और संवाद की भावना को भी बल मिला है। इससे पहले पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए आज संसद में एंटी पेपर लीक बिल पेश किया गया। इस बिल को पेश करने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को दी गई। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो सकी और कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

 

चर्चा के बाद सरकार इन सुझावों का जवाब देगी 

यह बिल सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा माफिया और अन्य अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। मंगलवार को होने वाली चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल  विधेयक के प्रावधानों पर अपने सुझाव और संशोधन भी रख सकते हैं। चर्चा के बाद सरकार इन सुझावों का जवाब देगी और इसके बाद विधेयक को सदन की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। संसदीय परंपराओं के अनुरूप अध्यक्ष ओम बिरला की पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद, सहमति और विस्तृत चर्चा ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उनके प्रयासों से सभी दलों का चर्चा के लिए तैयार होना संसदीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

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