दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 13 दिनों से छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं। कैंपस में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल हो रही है। लेकिन इस बीच यूनिवर्सिटी से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। जामिया की दीवारों पर कई देश विरोधी और भड़काऊ नारे लिखे गए हैं। किसी नारे में शरजील इमाम की रिहाई की मांग की गई तो कहीं कश्मीर को आजाद करने की बात लिखी गई है। RSS और ABVP के खिलाफ भी कई भड़काऊ स्लोगन लिखे गए हैं। सवाल ये है कि आखिर जामिया की दीवारों पर ये नफरती नारे किसने लिखे। यूनिवर्सिटी के छात्र कह रहे हैं कि ये किसी बाहर वाले का काम है। लेकिन सवाल है कि आखिर इतने बड़े पैमाने में किस बाहर वाले ने आकर ये सारे नारे लिख दिए। कौन है जो देश में अराजकता और नफरत का माहौल खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे लोगों को मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा- गिरिराज
अब इस पूरे मामले पर राजनीति और बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी अब कांग्रेस और बाकी विपक्षी दलों की चुप्पी पर हमलावर है। जामिया मामले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि जामिया स्लोगन मामले पर अब तक राहुल गांधी, कॉकरोच पार्टी और अखिलेश यादव की तरफ से कोई बयान क्यों नहीं आया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कौन माई का लाल ऐसा पैदा हो गया है जो भारत को तोड़ना चाहता है। यह बताता है कि उनकी मानसिकता क्या है। यह वही जामिया मिलिया है जहां शाहीनबाग बना था, ये वही एरिया है। अब देश के लोगों को, देशभक्तों को यह सोचना पड़ेगा कि ऐसे लोगों का मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा।
यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने अपनाया कड़ा रुख
जामिया की दीवार पर लिखे फ्री कश्मीर और फ्री शरजील जैसे स्लोगन को लेकर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने कड़ा रुख अपनाया है। जामिया प्रशासन ने साफ कहा है कि अगर विवादित नारों के पीछे जामिया छात्रों का इन्वॉलमेंट पाया गया तो उनपर सख्त एक्शन होगा। उन्हें यूनिवर्सिटी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। अगर बाहर के किसी शख्स ने जामिया को बदनाम करने के मकसद से ये किया है तो उसके खिलाफ जामिया प्रशासन बड़ी कार्रवाई करेगा।
जामिया आंदोलन को बाहरी तत्व दे रहे हवा
जामिया प्रशासन का कहना है कि कुछ बाहरी तत्व और राजनीतिक पार्टी इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं, जिससे शांतिपूर्ण समाधान नहीं हो पा रहा है। प्रशासन का कहना है छात्र धरना खत्म करने को तैयार हैं लेकिन बाहरी नेता उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहे हैं।
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