संसद के मौजूदा सत्र के अब अंतिम कुछ घंटे बचे हैं। इस बीच, गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को नीट और छात्रों से जुड़े मुद्दे पर सदन में चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को लिखित पत्र भेजकर विपक्ष से समय तय करने और चर्चा कराने का आग्रह भी किया। अमित शाह ने कहा कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, चर्चा के प्रस्ताव पर राहुल गांधी ने इसे लेकर असहमति जताई और कहा कि उन्हें अमित शाह का भाषण नहीं सुनना। इन्हीं मुद्दों पर इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra कार्यक्रम में चर्चा हुई। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में विनोद अग्निहोत्री और मनोज कुमार सिंह मौजूद रहे।
क्या राहुल गांधी को 'जवाब' नहीं, राजनीतिक क्रेडिट चाहिए?
कार्यक्रम में चर्चा के दौरान यह सवाल उठाया गया कि क्या राहुल गांधी के लिए गृह मंत्री का जवाब सुनना राजनीतिक रूप से फायदेमंद नहीं है। मेहमानों के मुताबिक, यदि सदन में अमित शाह तथ्यों के साथ जवाब देते हैं तो अंतिम संदेश सरकार के पक्ष में जा सकता है। वहीं, यदि बिना चर्चा के सत्र समाप्त होता है तो राहुल गांधी के पास यह कहने का मौका रहेगा कि विपक्ष जवाब मांगता रहा, लेकिन गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए।
चर्चा में यह भी कहा गया कि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहता है। सार्वजनिक सभाओं में छात्रों के मुद्दे और सरकार से जवाब मांगने की बात को प्रमुखता से उठाया जा सकता है।
पहले शिक्षा मंत्री, फिर गृह मंत्री बने मुद्दे का केंद्र
चर्चा के दौरान कहा गया कि शुरुआत में नीट पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा मुख्य रूप से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जुड़ा था। बाद में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों के बाद गृह मंत्री अमित शाह भी विपक्ष के निशाने पर आ गए। कार्यक्रम में आए मेहमानों ने कहा कि सड़क पर हुए आंदोलन का दबाव सरकार पर ज्यादा दिखाई दिया और छात्रों से बातचीत के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा भी सामने आया।
FCRA बिल पर सरकार को झटका
चर्चा में संसद के कामकाज और FCRA बिल का भी जिक्र हुआ। चर्चा में शामिल मेहमानों के अनुसार, सरकार के पास संख्या होने के बावजूद बिल को पारित नहीं कराया जा सका और उसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। इसे सरकार के लिए दबाव वाली स्थिति के तौर पर देखा गया।
यूपी चुनाव को लेकर भी चर्चा
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बीजेपी के सामने चुनौती है, लेकिन अभी उसकी स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। समाजवादी पार्टी के लिए 100 से ऊपर सीटों की लड़ाई और बीजेपी के लिए 200 से ऊपर जाने की चुनौती का आकलन सामने रखा गया। कांग्रेस को लेकर कहा गया कि राहुल गांधी के प्रति आकर्षण बढ़ा है, लेकिन पार्टी का संगठन अभी कमजोर है और अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में कांग्रेस को बड़ा लाभ मिलना मुश्किल है।
बीजेपी के मीडिया सेल पर भी सवाल
चर्चा में यह भी कहा गया कि पिछले 15 दिन से चले घटनाक्रम में बीजेपी का मीडिया और आईटी सेल अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया। नई राष्ट्रीय टीम के आने के बाद पार्टी के संचार तंत्र में बदलाव और नए उत्साह की उम्मीद जताई गई। कार्यक्रम के अंत में संसद सत्र के आगे बढ़ने या समाप्त होने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।
(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)