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कांग्रेस ने उमर अब्दुल्ला सरकार में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकराया, प्रदेश अध्यक्ष ने बताई वजह

 Reported By: Manzoor Mir Written By: Mangal Yadav
 Published : Aug 28, 2026 08:17 am IST,  Updated : Aug 28, 2026 08:34 am IST

कांग्रेस ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की सरकार में शामिल नहीं होगी, लेकिन बाहर से समर्थन देती रहेगी। कांग्रेस ने कहा कि जब तक ज़मीन, नौकरी और राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) जैसे लोगों के संवैधानिक अधिकार बहाल नहीं हो जाते, तब तक पार्टी उमर अब्दुल्ला की सरकार में कैबिनेट का कोई पद स्वीकार नहीं करेगी।

सीएम उमर अब्दुल्ला। फाइल- India TV Hindi
सीएम उमर अब्दुल्ला। फाइल Image Source : PTI

श्रीनगर:  कांग्रेस ने प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार से पहले उमर अब्दुल्ला सरकार में शामिल होने की नेशनल कॉन्फ्रेंस की नई पेशकश को ठुकरा दिया है। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के सांप्रदायिक सद्भाव और एकता की रक्षा के एकमात्र उद्देश्य से नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन दिया था। पिछले दो सालों में हमारा स्टैंड बिल्कुल साफ रहा है। जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता, हम कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनेंगे। नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि हम कैबिनेट में शामिल हो जाएंगे। 

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को कैबिनेट में शामिल होने का दिया था प्रस्ताव

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पिछले हफ़्ते कांग्रेस को कैबिनेट में शामिल होने का नया प्रस्ताव दिया था। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि इस प्रस्ताव और इस बात को लेकर काफ़ी अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या कांग्रेस सरकार में शामिल होगी या नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सिद्धांतों पर आधारित रुख अपनाया है और पार्टी अपना रुख नहीं बदलेगी।

सरकार का समर्थन जारी रहेगाः कांग्रेस

तारिक हमीद कर्रा ने कहा, "केंद्र सरकार ने एकतरफा और असंवैधानिक रूप से जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकार छीन लिए हैं। जब तक वे अधिकार बहाल नहीं हो जाते, कांग्रेस पार्टी कैबिनेट में शामिल नहीं होगी। लेकिन हम सरकार का समर्थन जारी रखेंगे। हम चाहते हैं कि राज्य का दर्जा और ज़मीन व नौकरियों पर संवैधानिक अधिकार बहाल हों।"

राज्य का दर्जा बहाल करना और जमीन, नौकरियों और प्राकृतिक संसाधनों पर लोगों के अधिकारों की रक्षा करना पार्टी की सबसे बड़ी मांग रही है। एक केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते, जम्मू-कश्मीर में मंत्रियों की काउंसिल के आकार की एक कानूनी सीमा है। हालांकि, काउंसिल में अब मुख्यमंत्री सहित नौ की मंज़ूर संख्या के मुकाबले छह मंत्री हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस में मतभेद की अटकलें

सरकार बनने के दौरान कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं हुई थी। कथित तौर पर कम मंत्री पद मिलने से कांग्रेस नाराज थी। पिछले साल अक्टूबर में राज्यसभा सीट-बंटवारे में अपने सहयोगी दल पर धोखे का आरोप लगाने के बाद गठबंधन में दरारें और बढ़ गईं। केंद्र शासित प्रदेश की चार सीटों के लिए राज्यसभा चुनावों से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन उम्मीदवारों की घोषणा की और कांग्रेस को चौथी सीट की पेशकश की, जिसे जीतने लायक नहीं माना जा रहा था। कांग्रेस का कहना था कि उसे सुरक्षित सीट का भरोसा दिया गया था, इसलिए उसने चुनाव न लड़ने का फ़ैसला किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पहली तीन सीटें जीतीं। चौथी सीट BJP के सत शर्मा ने जीती थी।

बता दें कि 90 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 46 सीटों की ज़रूरत है। अभी नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41 और कांग्रेस के पास 6 विधायक हैं, जिससे इन दोनों पार्टियों का कुल आंकड़ा 47 हो जाता है। बीजेपी के पास 29 और PDP के पास 4 सीटें हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस को कुछ छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है।

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