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पिछले साल से आत्मघाती हमलावर की तलाश में था ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल, JK पुलिस का बड़ा खुलासा

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Nov 16, 2025 06:09 pm IST,  Updated : Nov 16, 2025 06:12 pm IST

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके में 13 लोगों की जान गई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस पूरे सफेदपोश डॉक्टरों के गैंग वाले आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस बीच जेके पुलिस ने चौकाने वाला खुलासा भी किया है।

दिल्ली में धमाका और आतंकी उमर मोहम्मद- India TV Hindi
दिल्ली में धमाका और आतंकी उमर मोहम्मद Image Source : PTI AND REPORTER INPUT

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में डॉक्टरों के नेतृत्व वाले जिस ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, वह पिछले साल से ही एक आत्मघाती हमलावर की तलाश में जुटा था। मुख्य साजिशकर्ता डॉक्टर उमर नबी इस एजेंडे को लगातार आगे बढ़ा रहा था। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। 

घोर कट्टरपंथी था उमर मोहम्मद

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार सह-आरोपी से पूछताछ में पता चला है कि डॉक्टर उमर 'घोर कट्टरपंथी' था और वह लगातार इस बात पर जोर देता था कि उनके अभियान की सफलता के लिए एक आत्मघाती हमलावर जरूरी था। माना जा रहा है कि डॉक्टर उमर विस्फोटकों से भरी उस कार में सवार था, जिसमें 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोट हो गया था। 

ऐसे हिरासत में लिया गया दानिश

अधिकारियों के मुताबिक, श्रीनगर पुलिस ने डॉ. अदील राथर और डॉ. मुजफ्फर गनई सहित अन्य सह-आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अपनी एक टीम को फौरन दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड भेजा तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक जसीर उर्फ ‘दानिश’ को हिरासत में ले लिया। 

ऐसे हुआ ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ 

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ.जी.वी. संदीप चक्रवर्ती के नेतृत्व में श्रीनगर पुलिस ने पूरे ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने पिछले साल अक्टूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ से मुलाकात की बात स्वीकारी, जहां से उसे फरीदाबाद (हरियाणा) के अल-फलाह विश्वविद्यालय में किराये के एक कमरे में ले जाया गया। 

अप्रैल में विफल हुई योजना

अधिकारियों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने बताया कि मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोग उसे प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद के लिए ‘ओवर-ग्राउंड वर्कर’ (ओजीडब्ल्यू) बनाना चाहते थे, लेकिन डॉ. उमर ने कई महीनों तक उसे बरगलाया, ताकि वह आत्मघाती हमलावर बन सके। ‘ओवर-ग्राउंड वर्कर’ का मतलब आतंकवादियों के मददगार से है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि डॉ. उमर और मॉड्यूल से जुड़े अन्य सदस्यों की योजना इस साल अप्रैल में विफल हो गई, जब हिरासत में लिया गया व्यक्ति अपनी खराब माली हालत और इस्लाम में खुदकुशी वर्जित होने की बात का हवाला देते हुए पीछे हट गया। 

6 दिसंबर को भी दहशत फैलाने का था प्लान

अधिकारियों के अनुसार, आत्मघाती हमलावर की तलाश की योजना जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क की जांच में एक नया खतरनाक आयाम जोड़ती है। जैसा कि ‘पीटीआई-भाषा’ ने पहले अपनी खबर में बताया था, पुलवामा का 28 वर्षीय डॉक्टर उमर कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले नेटवर्क का सबसे कट्टरपंथी सदस्य था और अधिकारियों का मानना ​​है कि वह छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के आसपास एक शक्तिशाली कार बम विस्फोट की साजिश रच रहा था। 

2021 में की तुर्किये की यात्रा

हालांकि, अधिकारियों ने साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि डॉ. उमर की साजिश राष्ट्रीय राजधानी या धार्मिक महत्व के किसी स्थान पर भीड़भाड़ वाली जगह पर विस्फोटकों से भरा वाहन छोड़कर गायब होने की थी। अधिकारियों ने सह-आरोपी से पूछताछ के आधार पर बताया कि डॉ. उमर 2021 में सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल अहमद गनी के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद कट्टरपंथी बनना शुरू हुआ, जहां दोनों कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के ओजीडब्ल्यू से मिले थे। 

खुले बाजार से इकट्ठा किया रसायन

अधिकारियों के मुताबिक, सह-आरोपी ने बताया कि अल-फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ. उमर और गनई ने तुर्किये की यात्रा के बाद खुले बाजार से भारी मात्रा में रसायन इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जिसमें 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल था तथा इनका अधिकांश हिस्सा विश्वविद्यालय परिसर के पास सहेजकर रखा गया था। 

दिल्ली धमाके में 13 की मौत

अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर में बड़े विस्फोट की साजिश तब नाकाम हो गई, जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के परिणामस्वरूप गनई की गिरफ्तारी और विस्फोटकों की जब्ती संभव हुई, जिससे डॉ. उमर संभवत: डर गया और अंतत: 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोट की घटना घटी, जिसमें 13 लोग मारे गए। 

इन आतंकियों को किया गया गिरफ्तार

अधिकारियों के अनुसार, 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दिखने की एक छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद इस जटिल अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया और सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले, जिसके बाद तीन स्थानीय लोगों-आरिफ निसार डार उर्फ ​​साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ ​​शाहिद को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ पहले भी पत्थरबाजी के मामले दर्ज हैं।  अधिकारियों ने बताया कि साहिल, यासिर और मकसूद से पूछताछ के बाद शोपियां के एक पूर्व पैरामेडिक और इमाम मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित तौर पर पोस्टर मुहैया कराए थे और डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाने के लिए अपनी पहुंच का इस्तेमाल किया था। (भाषा के इनपुट के साथ)

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