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बोकारो: थर्मल प्लांट 5 दिन से बंद, DVC को 30 करोड़ का नुकसान, छाई ढोने के लिए नहीं मिल रहे ट्रक

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Nov 17, 2025 06:23 pm IST,  Updated : Nov 17, 2025 06:52 pm IST

एक समय पर 70 से ज्यादा हाईवा छाई की ढुलाई में लगे रहते थे। अब इस काम के लिए 10 ट्रक भी नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से प्लांट का काम ठप हो चुका है।

Bokaro Thermal plant - India TV Hindi
बोकारो थर्मल प्लांट Image Source : FB/BOKAROTHERMALPOWERSTATION

बोकारो थर्मल पावर प्लांट पिछले 5 दिन से बंद है। यहां छाई धुलाई के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं। इस वजह से प्लांट बंद पड़ा है। प्लांट बंद होने के कारण डीवीसी को पांच दिन में 30 करोड़ का नुकसान हो चुका है। प्रतिदिन प्लांट से करीब 3000 मैट्रिक टैंक छाई निकलती है। छाई ढुलाई में लगने वाले अधिकतर वाहन कोयला में चलने लगे हैं। इससे पहले 70 से अधिक हाईवा रोजाना छाई ढुलाई में लगे रहते थे। अब 10 हाईवा भी इस काम के लिए नहीं मिल रहे हैं।

थर्मल पावर प्लांट को बीते मंगलवार रात 1:30 बजे बंद करना पड़ा था, क्योंकि छाई रखने की निर्धारित जगह पूरी तरह भर चुकी थी। जब तक छाई भरने की नई जगह खाली नहीं होगी तब तक प्लांट को चालू करना संभव नहीं है। यहां पिछले दिनों मजदूरों का आंदोलन भी यहां देखने को मिला था, लेकिन गुरुवार को डीबीसी प्रबंधन और मजदूरों के बीच वार्ता भी हुई, जिसमें बोकारो एसी मुमताज अंसारी, एसडीएम मुकेश छुआ, एसडीपीओ बी एन सिंह, समिति और जनप्रतिनिधि, पुलिस पदाधिकारी और जिला प्रशासन के लोग मौजूद रहे।

क्यों बंद हुआ प्लांट?

बैठक के बाद मजदूरों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया, लेकिन हाइवा की कमी ने पूरी प्रक्रिया की रफ्तार को रोक दिया है। प्लांट बंद होने का मूल वजह 4 महीने तक आंदोलन चलना है। हाइवा संगठन और विस्थापितों की ओर से प्रति किलोमीटर छाई ढुलाई दर को चार रुपए से बढ़कर ₹10 करने की मांग को लेकर 4 महीने तक काम बंद रहा। एक नवंबर को एसडीएम की अध्यक्षता में समझौता हुआ, जिसके बाद आंदोलन तो समाप्त कर दिया गया, लेकिन 55 मजदूरों का 4 माह का बकाया वेतन नहीं मिलने से 6 जुलाई को तत्काल काम शुरू नहीं हो सका। अब जब मजदूरों ने आंदोलन समाप्त कर दिया है, तब भी हाइवा की कमी के कारण प्लांट चालू नहीं हो पा रहा है।

क्या होती है छाई?

थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख को ही छाई कहा जाता है। जब कोयले को थर्मल पावर प्लांट में जलाया जाता है, तो उसमें मौजूद अकार्बनिक हिस्सा बहुत बारीक कणों के रूप में चिमनी से धुएँ के साथ उड़ता है, इसलिए इन्हें फ्लाई ऐश या छाई कहते हैं। यह बहुत हल्की, ग्रे या भूरी रंग की पाउडर जैसी होती है, जिसके कण 0.5 माइक्रोन से 300 माइक्रोन तक के होते हैं। भारत में कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट से हर साल लगभग 23-25 करोड़ टन राख निकलती है। फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, ईंट और सड़क बनाने में होता है।

(बोकारो से मृत्युंजय मिश्रा की रिपोर्ट)

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