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धनबाद में आवारा कुत्तों ने घर के पास खेल रहे 5 साल के बच्चे को बुरी तरह नोंच डाला, मासूम की दर्दनाक मौत

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : May 02, 2026 07:47 pm IST,  Updated : May 02, 2026 07:49 pm IST

धनबाद में आवारा कुत्तों के काटने से एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। घर के पास खेल रहे बच्चे को आवारा कुत्तों ने बुरी तरह नोंच डाला। इस घटना से स्थानीय लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

धनबादः झारखंड के धनबाद जिले में आवारा कुत्तों का कहर एक बार फिर सुर्खियों में है। गोनूडीह ओपी क्षेत्र के भोला नाथ बसेरिया 4 नंबर यादव बस्ती में 5 वर्षीय मासूम अंकित की कुत्तों के झुंड ने बुरी तरह काटकर मार डाला। परिजनों के मुताबिक, अंकित अपने घर से महज कुछ कदम दूर हनुमान मंदिर के पास खेल रहा था। अचानक आवारा कुत्तों का झुंड उसे घेर लिया और उसके नन्हे शरीर को नोंच डाला। गले, हाथ-पैर और पेट पर गहरे घावों से मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिजन जब शव तक पहुंचे तो दहाड़ मारकर रो पड़े। मां-बाप का आंसुओं से भीगता चेहरा देख इलाके में सन्नाटा छा गया।

स्थानीय निवासी टुनटुन यादव ने कहा, "नगर निगम की लापरवाही से कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। समय रहते कदम न उठे तो ऐसी त्रासदियां रोज होंगी। पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा दें। मृतक के चाचा रोहित यादव ने गुस्से में बोला, "प्रशासन सो रहा है! इन आवारा कुत्तों को पकड़कर दूर भेजो, वरना और मासूमों की जान जाएगी।" स्थानीय लोग नगर निगम पर इलाके में कुत्तों की बढ़ती संख्या को रोकने में नाकामी का आरोप लगा रहे हैं। धनबाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन परिवार न्याय की प्रतीक्षा में टूट रहा है।

चौंकाने वाले आंकड़े

 धनबाद में 2025 में 150+ लोग कुत्तों के शिकार बने। झारखंड में 2000+ मामले सामने आए। राष्ट्रीय स्तर पर 2024-25 में 30,000 से ज्यादा लोगों की मौत कुत्तों के काटने से हुई।  

शहर का हर कोना खतरनाक, बच्चे भी सहमे हुए

धनबाद के हीरापुर, धैया, जयप्रकाश नगर, वासेपुर समेत लगभग हर मोहल्ले में आज आवारा कुत्तों के झुंड दिखते हैं। लोग कहते हैं, ऐसा कोई भी मोहल्ला नहीं है जहां कुत्तों का आतंक नहीं हो। रात के अंधेरे में तो ये झुंड बेहद खतरनाक हो जाते हैं और राहगीरों पर हमला कर देते हैं।

आवारा कुत्तों के डर से बच्चे घर से बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। छोटी‑छोटी गलियां, खेल के मैदान, आंगन और मंदिर के पास की गलियां भी अब उनके लिए खतरनाक मानी जाने लगी हैं। कुत्ते काटने की घटनाएं हर दिन बढ़ रही हैं, जिससे लोग पैदल निकलने से भी हिचकिचाते हैं।

नसबंदी और वैक्सीन की मुहिम

कुत्तों की आबादी पर लगाम लगाने के लिए धनबाद नगर निगम ने मध्य प्रदेश की एजेंसी “केयर ऑफ एनिमल सोसाइटी” को जिम्मा दिया है। पिछले तीन साल में 10,634 कुत्तों की नसबंदी और बंध्याकरण किया गया है और सभी को एंटी रेबिज वैक्सीन भी दी गई है। हर महीने औसतन 500–600 कुत्तों को पकड़कर झरिया के चांदकुइंया स्थित अस्पताल ले जाया जाता है, जहां नर कुत्तों की नसबंदी और मादा कुत्तियों का बंध्याकरण किया जाता है। बर्थ कंट्रोल योजना के तहत हर महीने इसी गति से काम चल रहा है।

चूकि, नगर निगम चुनाव से पहले नगर निगम द्वारा कुत्तों का नसबंदी और बंध्याकरण कार्यक्रम रोक दिया गया था जिसके कारण एक बार फिर आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है और मासूम बच्चें ही सबसे ज़्यादा इनके शिकार होते हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार धनबाद जिले में कुल आबादी के लगभग 5% हिस्से पर कुत्ते पाए जाते हैं। धनबाद शहर की आबादी लगभग 30 लाख मानी जाए, तो कुत्तों की संख्या लगभग 1.5 लाख होने का अनुमान है।

 रिपोर्ट- कुंदन सिंह, धनबाद

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