कोल इंडिया लिमिटेड (CCL) के गिरिडीह एरिया स्थित लंकास्टर अस्पताल परिसर में मंगलवार तड़के हुए व्यापक भू‑धंसान ने दो अस्पताल भवनों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया और आसपास की जमीन में चौड़ी दरारें पैदा कर दीं। घटना के समय तैनात कर्मचारियों द्वारा तुरंत कार्रवाई के कारण किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं मिली, फिर भी यह घटना राज्य और केंद्र दोनों के समक्ष गंभीर सुरक्षा व प्रशासनिक सवाल खड़े करती है।
अस्पताल कर्मियों ने जमीन धंसते देखी
अस्पताल कर्मियों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार सुबह 4 बजे के करीब बाहर निकलकर देखा कि भवन और जमीन एक साथ धंस रहे हैं। तुरंत सभी कर्मियों को सुरक्षित निकाला गया और अधिकारियों को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची कंपनी और प्रशासनिक टीम ने प्रभावित क्षेत्र को तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा क्षेत्र घोषित कर दिया है और CCL गार्ड व होम गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। जीएम और गिरिडीह एरिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत निरीक्षण कर आपातकालीन कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि घटना की तकनीकी जांच हेतु विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है और आगे की रणनीति जांच रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी।

भू‑धंसान की मुख्य वजह क्या?
स्थानीय लोगों व अधिकारियों के मुताबिक इस इलाके में दशकों से जारी अवैध कोयला खनन इस भू‑धंसान का मुख्य कारण बताया जा रहा है। लंबे समय तक बिना नियमन और मानकों के चलने वाले खनन कार्य ने जमीन के नीचे बड़े‑बड़े खाली स्थान छोड़ दिए हैं, जिससे सतह की स्थिरता प्रभावित हुई है। जगह‑जगह बने गुहाकार ढांचे और कमजोर भू‑संरचना मौसम तथा जलभराव की मामूली घटनाओं के साथ मिलकर अचानक बड़े भू‑धंसान को जन्म दे सकती है। हालांकि सटीक कारणों का खुलासा स्वतंत्र तकनीकी जांच के बाद ही संभव होगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से की गई शिकायतों पर कार्रवाई न होने से यह खतरा बनता जा रहा था।
वर्षों से अवैध खनन जारी, कोई ठोस कार्रवाई नहीं
अस्पताल के प्रभावित हिस्से में कई चिकित्सकीय सुविधाएं और सहायक इकाइयां शामिल थीं। इनका अस्थायी या स्थायी बंद होना न केवल अस्पताल के कर्मचारियों को प्रभावित करता है बल्कि मरीजों के उपचार में व्यवधान और आसपास के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पहुंच पर भी सीधा असर डालता है। अस्पताल कर्मी दिलीप कुमार ने कहा, "हमने समय रहते सबको बाहर निकाला वरना परिणाम भयानक हो सकते थे।" स्थानीय नागरिक भी कहते हैं कि अवैध खनन वर्षों से जारी है लेकिन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

घटना के बाद जिला प्रशासन और सीसीएल दोनों की प्रतिक्रिया में जांच व सुरक्षा पर जोर दिख रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि केवल जांच की घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रभावित इलाके में त्वरित भूतली सर्वे, ड्रोन‑आधारित मॉनिटरिंग और भू‑स्थैतिक परीक्षण कराये जायें ताकि संभावित जोखिम वालों की भूमिका और जांच स्पष्ट हो सके। साथ ही, अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई और संबंधित इलाकों का स्थायी मानचित्रण आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
लंकास्टर अस्पताल का धंसना चेतावनी की घंटी
यह घटना केवल एक स्थानीय आपदा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, संरचनात्मक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के व्यापक प्रश्न उठाती है। यदि एक सार्वजनिक अस्पताल ही असुरक्षित साबित हो रहा है, तो अन्य नागरिक अवसंरचनाएं भी जोखिम में हैं। यह राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के लिए तत्काल संज्ञान और निर्णायक कार्रवाई की मांग करता है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि प्रभावित भवनों का विस्तृत आकलन और रिपोर्ट तैयार होने के बाद पुनर्वास, मरम्मत या संरचनात्मक बंदोबस्त पर निर्णय लिया जाएगा। जांच में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता मिलने पर सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।
लंकास्टर अस्पताल का धंसना चेतावनी की घंटी है। इसे नजरअंदाज करना संभव नहीं, इसके पीछे निहित कारणों की पारदर्शी जांच और दोषियों की जवाबदेही के बिना इलाके की सुरक्षा बहाल नहीं हो सकेगी। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस घटना को तात्कालिक सार्वजनिक खतरे के रूप में लेते हुए प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपाय करेगी।
इससे पहले शनिवार को झारखंड के धनबाद में अचानक जमीन धंसने और खिसकने से अफरा-तफरी मच गई। घटना झरिया के बस्ताकोला एरिया-9 के भगतडीह इलाके की है। यहां पुराने आरएसपी कॉलेज के पीछे कामिनी कल्याण क्षेत्र के कई मकानों में बड़ी दरारें पड़ गईं और स्थानीय लोग दहशत में हैं।
(रिपोर्ट- कुंदन सिंह)
यह भी पढ़ें-
झारखंड के रामगढ़ में आयरन फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद लगी आग, तीन इंजीनियरों की मौत, एक मजदूर घायल