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मनुष्य के लिए जहर के समान है इस एक चीज की अधिकता, जरूरत के हिसाब से ही होने में भलाई

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Jan 30, 2021 07:50 am IST,  Updated : Jan 30, 2021 07:50 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भरे ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार धन पर आधारित है। 

'किसी व्यक्ति के पास जरूरत से ज्यादा धन हो जाए वो धन का दुरुपयोग करने लगता है। जिससे उसे बुरी आदतें भी लग सकती हैं। इसलिए धन की अति भी जहर के समान है।' आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि मनुष्य के पास हमेशा धन सीमित मात्रा में ही होना चाहिए। सीमित मात्रा का मतलब है कि उसकी सारी जरूरतें पूरी हो जाएं। जिस मनुष्य के पास सीमित धन होगा वो अपनी इच्छाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरी करेगा। ऐसे मनुष्य का दिमाग किसी भी गलत काम या फिर गलत चीजों की ओर धन खर्च करने को लेकर नहीं जाएगा। जिसकी वजह सीमित मात्रा में धन का होना है।

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इसके उलट जिस व्यक्ति के पास जरूरत से ज्यादा पैसा होता है उसका दिमाग बस यही चलता रहता है कि वो उसे कहां खर्च करें। हालांकि ऐसा होना हर बार भी सही नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि ज्यादा पैसा कई बार मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है। उसके दिमाग में पैसों की गर्मी इस कदर भरी रहती है कि वो अपने सामने किसी को भी कुछ नहीं समझता। यहां तक कि कई बार वो गलत राह पर चल पड़ता है। 

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गलत राह का मतलब बुरी लत से है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने का कहना है कि मनुष्य के पास इतना पैसा हो कि उसकी जरूरतें पूरी हो जाएं। अन्यथा आगे चलकर ज्यादा पैसा उसके लिए जहर के समान हो जाता है। 

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