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Lohri 2019: लोहड़ी मनाने के पीछे असली वजह है ये, 'दुल्ला भाटी' न होते तो आज लोहड़ी भी न होती

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Jan 13, 2019 06:44 am IST,  Updated : Jan 13, 2019 06:44 am IST

Lohri 2019: दरअसल लोहड़ी के इस त्योहार को मनाने के पीछे इतिहास के कुछ पन्ने भी जुड़े हैं। इस दिन को मुगलशासकों के विरुद्ध न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नायक, परमवीर, हिन्दू गुर्जर अब्दुल्ला भाटी की याद में मनाया जाता है। जानें असली वजह।

Lohri 2019- India TV Hindi
Lohri 2019 Image Source : INDIA TV

लोहड़ी 2019: आज पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और रविवार का दिन है। आज दोपहर पहले 11 बजकर 06 मिनट तक सारे काम बनाने वाला रवि योग और राज योग भी रहेगा। आज के दिन सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। इसके साथ ही आज लोहड़ी का त्योहार भी मनाया जायेगा। लोहड़ी का ये त्योहार मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। उत्तर भारत में, खासकर कि पंजाब में इस त्योहार का महत्व है। जिन लोगों की नई-नई शादी हुई हो या जिनके घर में बच्चा हुआ हो, उन लोगों के लिये ये त्योहार विशेष महत्व रखता है।

आज के दिन शाम के समय लकड़ियों और गोबर के उपलों को इकट्ठा करके जलाया जाता है और परिवार के साथ उसके चारों ओर घेरा बनाकर परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा के समय जलती हुई आग में मूंगफली, रेवड़ी, तिल, मक्की के दाने आदि चीज़ें डालने की परंपरा है। कहते हैं ऐसा करने से दूसरों की बुरी नजर से छुटकारा मिलता है, घर में सुखद माहौल बनता है और व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। Happy Lohri 2019: अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ऐसे मैसेज भेजकर दें लोहड़ी की शुभकामनाएं

लोहड़ी बनाने के पीछे है ये कारण-दूल्ला भट्टी

दरअसल लोहड़ी के इस त्योहार को मनाने के पीछे इतिहास के कुछ पन्ने भी जुड़े हैं। इस दिन को मुगलशासकों के विरुद्ध न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नायक, परमवीर, हिन्दू गुर्जर अब्दुल्ला भाटी की याद में मनाया जाता है। अब्दुल्ला भाटी हमेशा सबकी मदद के लिये तैयार रहते थे। ऐसे ही एक बार उन्होंने एक ब्राह्मण की कन्या को मुगलशासक के चंगुल से छुडाया था और उसकी शादी एक सुयोग्य हिन्दू वर से करवायी थी। उस कन्या का नाम सुंदर मुंदरिए था। अब अब्दुल्ला भाटी कोई पंडित तो था नहीं, इसलिए उसने आस-पास पड़ी लकड़ियों और गोबर के उपलों को इकट्ठा करके उसमें आग जलायी और उसके पास जो कुछ खाने की चीज़ें जैसे मूंगफली, रेवड़ी आदि थीं, वो सब उसने आग में डाल दी और उन दोनों की शादी करवा दी। (Lohri 2019: आज है लोहड़ी, जानें आग जलाने का महत्व और पूजन मुहूर्त )

शादी के समय अब्दुल्ला भाटी ने कुछ इस तरह का गीत भी गाया था...
सुन्दर मुंदरिए
तेरा कौन विचारा
दुल्ला भट्टीवाला
दुल्ले दी धी व्याही
सेर शक्कर पायी
कुड़ी दा लाल पताका

इस प्रकार उन दोनों की शादी तो हो गई, लेकिन बाद में मुगल शासकों ने अब्दुल्ला भाटी पर हमला कर दिया और वह मारा गया। तब से अब्दुल्ला भाटी की याद में लोहड़ी का ये त्योहार मनाया जाता है और शाम के समय लकड़ी और उपले जलाकर उसकी परिक्रमा की जाती है। आज के दिन एक-दूसरे को मूंगफली, रेवड़ियां आदि बांटने और खाने का भी रिवाज़ है।

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