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Navratri 4th day 2019: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की इस शुभ मुहूर्त में ऐसे करें पूजा विधि, साथ ही जानें मंत्र और भोग

परिवार में खुशहाली के लिये, अच्छे स्वास्थ्य के लिए और यश, बल तथा लंबी उम्र की प्राप्ति के लिये आज के दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करना चाहिए । जानें मां कुष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों के बारे में।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Published on: October 01, 2019 17:33 IST
Navratri 4th day 2019 kushmanda- India TV
Navratri 4th day 2019 kushmanda

Navratri 4th day, Maa Kushmanda Puja vidhi, Shubh muhurat Aarti and Mantra: आज आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और बुधवार का दिन है। आज नवरात्रि का चौथा दिन है। देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जायेगी । संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा का अर्थ होता है –कुम्हड़ा, जिसे आम भाषा में हम कद्दू या पेठा कहते हैं और जिसकी घर में हम सब्जी भी बनाते हैं। नवरात्र के दौरान देवी मां को कुम्हड़े की बलि बहुत प्रिय है। साथ ही परिवार में खुशहाली के लिये, अच्छे स्वास्थ्य के लिए और यश, बल तथा लंबी उम्र की प्राप्ति के लिये आज के दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करना चाहिए । जानें मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों के बारे में।

कूष्मांडा देवी की पूजा का शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि 01 अक्टूबर की दोपहर 01 बजकर 56 मिनट पर शुरू हो चुकी है जो 02 अक्टूबर की सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक रहेगी| इस मौके में पूजा करने से विशेष फल मिलेगा।  

कौन है मां कूष्मांडा?
मां कूष्मांडा माता दुर्गा का चौथा र्वरूप है। मां की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है, जबकि आठवें हाथ में जप की माला रहती है। माता का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। कहते हैं सूर्यलोक में निवास करने की क्षमता अगर किसी में है तो वह केवल मां कूष्मांडा में ही है। साथ ही माना जाता है कि देवी कूष्मांडा सूर्य देव को दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं।

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करें इस मंत्र का जाप
अच्छे स्वास्थ्य के लिए और यश, बल, परिवार में खुशहाली के साथ-साथ आयु की वृद्धि के लिए आज के दिन मां कूष्मांडा का ध्यान करके उनके इस मंत्र का जाप करना चाहिए-'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:' ..

मां कूष्मांडा का भोग
माता को इस दिन मालपुआ का प्रसाद चढ़ाने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही आज के दिन कन्याओं को रंग-बिरंगे रिबन व वस्त्र भेट करने से धन की वृद्धि होती है।

ऐसे करें मां कूष्मांडा की पूजा
दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा सच्चे मन से करना चाहिए। फिर मन को अनहत चक्र में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए। सबसे पहले सभी कलश में विराजमान देवी-देवता की पूजा करें फिर मां कूष्मांडा की पूजा करें। इसके बाद हाथों में फूल लेकर मां को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें।

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सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च. दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु।

फिर मां कूष्मांडा के इस मंत्र का जाप करें।
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां की पूजा के बाद महादेव और परमपिता ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा करें।

ध्यान
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पाठ
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

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