राजा रघुवंशी हत्याकांड ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी, जिसके बारे में आज भी इस घटना का जिक्र होते ही लोगों की रूह कांप उठती है। ऐसे कितने ही मर्डर केस हैं, जहां प्यार करने वालों के लिए शादी बाधा बन जाती है और वह खून की खेल खेलने से भी नहीं कतराते हैं। यह पहली बार नहीं है, जब प्यार को पाने के लिए कपल अपने पति-पत्नी को मार देते हैं। अब मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के बड़गोंदा से भी एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां सात फेरों का रिश्ता, प्रेमी की चाहत के आगे हार गया। आरोप है कि पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया।
राजीव बामनिया हत्याकांड
शादी दो दिलों का रिश्ता होती है, लेकिन जब उस रिश्ते में तीसरे की एंट्री होती है तो भरोसा सबसे पहले मरता है और उसके बाद इंसान के लिए प्यार भी कम होने लगता है। राजा रघुवंशी हत्याकांड की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि इंदौर के बड़गोंदा से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ गई। यह कहानी है 46 साल के राजीव बामनिया की, जिसे शायद यह उम्मीद थी कि वह अपनी पत्नी का गुस्सा शांत उसे मनाकर फिर से घर ले जाएगा, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस दरवाजे पर वह रिश्ता बचाने पहुंचा है। वहीं उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव उसका इंतजार कर रहा है।
पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर रची हत्या की साजिश
डीएसपी उमाकांत चौधरी के अनुसार राजीव की पत्नी पिछले करीब एक साल से अपने प्रेमी संतोष चौहान के साथ रह रही थी। 16 जुलाई को राजीव अपनी पत्नी को वापस घर लाने पहुंचा। पहले बहस हुई फिर गुस्सा भड़का और बाद में प्रेमी ने लोहे की टॉमी उठाकर राजीव के सिर पर एक के बाद एक कई वार कर दिए। पुलिस ने बताया कि खून से लथपथ राजीव जमीन पर गिर पड़ा और कुछ ही देर में उसकी सांसें हमेशा के लिए थम गई। इंदौर की यह वारदात एक बार फिर बता रही है कि इश्क, जब जुनून और जिद में बदल जाए तो उसकी आखिरी मंजिल अक्सर अदालत या फिर श्मशान ही होती है।
दोनों आरोपी हुए गिरफ्तार
शुरुआत में यह मामला सामान्य मौत जैसा लगा, लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी परत-दर-परत साजिश के राज खुलते चले गए। जांच में पत्नी की भूमिका भी सामने आई और पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी दोनों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। राजा रघुवंशी हो या फिर बड़गोंदा का राजीव दोनों मामलों की जांच अलग है, हालात अलग हैं, लेकिन एक सवाल दोनों घटनाएं छोड़ जाती हैं। क्या अवैध रिश्तों का अंधा जुनून अब रिश्तों को बचाने नहीं मिटाने लगा है? प्यार विश्वास की जगह साजिश बन जाएगा, जब जीवनसाथी ही जान का दुश्मन बन जाए तब सिर्फ एक परिवार नहीं टूटता, बल्कि समाज के सामने भी कई सवाल खड़े हो जाते हैं।
(इनपुट - भरत पाटिल)
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