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भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से राहत, जस्टिस को कॉल करने के मामले में दी सख्त चेतावनी, माफी स्वीकार

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Jul 22, 2026 08:45 pm IST,  Updated : Jul 22, 2026 08:45 pm IST

कटनी के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को जस्टिस विशाल मिश्रा को कॉल और मैसेज करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने संजय पाठक को चेतावनी देते हुए बिना शर्त माफी स्वीकार कर ली है।

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भाजपा विधायक संजय पाठक। Image Source : INSTAGRAM/@SANJAYPATHAK.IN

मध्यप्रदेश के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक एवं खनन कारोबारी संजय पाठक को आपराधिक अवमानना मामले में राहत देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी माफी बिना शर्त स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने जज को फोन लगाने और मैसेज करने को अवमानना माना, लेकिन संजय पाठक सजा से बच गए। कोर्ट ने 9 पन्नों का सुरक्षित फैसला सुनाते हुए संजय पाठक को अवमानना कार्रवाई से राहत दी, लेकिन साथ ही उन्हें चेतावनी दी कि वह भविष्य में इस तरह की हरकत न करें, वरना उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामला कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की तरफ से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें दीक्षित ने संजय पाठक से संबंधित कंपनी के खिलाफ लगभग 1200 करोड़ के अवैध उत्खनन रिकवरी का आरोप लगाया था और ये माममा हाईकोर्ट में लंबित था।

संजय पाठक ने जज को किया था कॉल

संजय पाठक ने 1200 करोड़ अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान 1 सितंबर 2025 को जज को किया था कॉल। जिसके बाद न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। उन्होंने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया कि विधायक संजय पाठक ने उनसे फोन पर बात करने का प्रयास किया था। इसलिए, मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अब वह इस केस की सुनवाई नहीं करेंगे। इसके बाद उन्होंने मामले को प्रशासनिक स्तर पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया और मामले पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी।

संजय पाठक ने मांगी थी माफी

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद संजय पाठक के वकील ने भी केस लड़ने से इंकार कर दिया था। वहीं हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की बैंच ने संजय पाठक के खिलाफ क्रिमिनल कंटेंप्ट दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए। हालांकि,

सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि संबंधित न्यायाधीश को वह गलती से कॉल कर बैठे थे और जैसे ही उन्हें गलती का एहसास हुआ, उन्होंन कॉल कट कर दिया। इसके बाद उन्होंने केवल शिष्टाचार के तौर पर अपना परिचय देते हुए उन्हें मैसेज किया था। उनका कहना था कि उनकी न्यायाधीश विशाल मिश्रा से किसी तरह की बातचीत नहीं हुई और न ही उनका न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने का कोई इरादा था।

कोर्ट ने लगाई फटकार

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संजय पाठक को फटकार लगाते हुए कहा कि, लंबित मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को संबंधित न्यायाधीश से मिलने, कॉल करने या किसी भी तरह से उनसे संपर्क करने की अनुमति नहीं है और न ही किसी व्यक्ति को ऐसा करना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह का कृत्य आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि, कोर्ट ने ये भी माना कि इस मामले में किसी भी तरह से न्यायकि प्रक्रिया बाधित नहीं हुई है। इसलिए अवमानना अधिनियम की धारा 13 के प्रावधानों के तहत विधायक की बिना शर्त माफी स्वाकार कर ली और उन्हें भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की चेतावनी दी।

(कटनी से देबजीत देब की रिपोर्ट)

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