राजगढ़ जिले के माचलपुर से लगे डूंगरी गांव में एक दुल्हन की घोड़ी पर बंदोली निकाली गई। जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बता दें कि आम तौर पर शादी से कुछ दिन पहले गांव में बंदोली निकाली जाती है। पहले ये रस्म अधिकतर दूल्हों के लिए होती थी। इसमें घोड़ी पर दूल्हों का जुलूस निकालकर रिश्तेदार और दोस्त नाचते हुए उसे गांव में घुमाते हैं। समाज में आए बदलाव के बाद अब बेटियों को भी बेटों से कम नहीं माना जा रहा है। आज के बदलते समय में राजगढ़ जिले के माचलपुर के डूंगरी गांव में रहने वाले महेश पाटीदार ने अपनी बेटी शिवानी के विवाह के दौरान निकाले बंदोली (बाने) में उन्हें घोड़ी पर बैठाकर गांव में जुलूस निकाला। इसकी अब गांव ही नहीं बल्की जिले में चर्चा हो रही है।
रानी जैसा हुआ अनुभव
दुल्हन शिवानी पाटीदार ने बताया कि मेरे पिता मेरा अभिमान हैं, उन्होंने मेरी शादी में कोई कमी नहीं रखी। उन्होंने दूल्हे की ही तरह घोड़ी, बैंड-बाजे का प्रबंध किया। साथ ही सभी तरह के पकवान बनवाए। मेरे पिता ने लाडो की तरह मुझे बड़ा किया है और लाडो ही तरह विदा किया है। मेरे-माता पिता से मैं बेहद प्यार करती हूं। उन्होंने कोई कमी मेरी शादी में नहीं रखी। घोड़ी पर बैठकर प्रोसेशन निकालना भी अपने आप में सुखद अनुभव रहा। रानी जैसी फिलिंग मुझे वहां बैठकर आई।

मेरी बेटी बेटों से कम नही
दुल्हन के पिता महेश पाटीदार ने बताया कि पहले बेटियों को बेटों से कम माना जाता है। लेकिन अब समय में तेजी से बदलाव हो रहा है। आज की बेटियों कंधे से कंधे मिलाकर बेटों की तरह आगे बढ़ रही है। मेरी बेटी को भी मैंने बेटे की तरह ही पाला है। वो मेरे लिए बेटों से कम नही है।
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जमकर किया डांस
बंदोली के दौरान दुल्हन शिवानी पाटीदार सजी-धजी घोड़ी पर सवार हुई। इस दौरान बंदोली में शामिल रिश्तेदारों और अन्य लोगों ने डीजे और ढोल की थाप पर जमकर डांस किया।
रिपोर्ट- गोविंद सोनी, राजगढ़