मध्य प्रदेश राज्य के पन्ना जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर से चर्चा में है, जहां से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक दुख खबर सामने आई है। किशनगढ़ कोर रेंज के तहत बृजपुरा बीट के दुर्गम पहाड़ी इलाके में शनिवार, 19 जुलाई 2026 को गश्ती दल को एक वयस्क नर बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला, जिसके बाद से वन विभाग में हलचल मची हुई है। पिछले तीन महीनों में टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में बाघ की मौत का यह तीसरा मामला है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
तीसरे बाघ की मौत ने बढ़ाई चिंता
किशनगढ़ कोर रेंज के तहत बृजपुरा बीट के एक दूर-दराज पहाड़ी इलाके में वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम को रूटीन निगरानी के दौरान बाघ का शव मिला। अधिकारियों के अनुसार घने जंगल में बाघ को बिना हिले-डुले लेटे हुए देखकर वन कर्मियों को पहले लगा कि वह आराम कर रहा है, लेकिन काफी देर तक शांति देखने के बाद टीम को शक हुआ और उन्होंने बाघ को पास से जाकर देखा। स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, कोई हरकत न होने की पुष्टि होने के बाद अधिकारी उस जगह तक पहुंचे। जांच करने पर उन्हें बाघ मृत मिला और उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया।
कैसे हुई बाघ की मौत
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि मृत बाघ के सभी अंग पूरी तरह सुरक्षित हैं और शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं हैं। प्रथम दृष्टया इसे प्राकृतिक मौत माना जा रहा है। इससे पहले गंगऊ में एक बाघ का कंकाल और तारा गांव से रेस्क्यू किए गए रेडियो कॉलर वाले बाघ की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही इन मौतों से पीटीआर में हलचल मचा गई है। फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों और डॉक्टरों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल इकट्ठा किया है। पन्ना टाइगर रिजर्व की तरह साल 2025 में बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान से भी कई बाघ और तेंदुओं की लगातार हो रही मौत पर बवाल हुआ था।
नियमानुसार किया गया बाघ का अंतिम संस्कार
इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों और तय नियमों के अनुसार सम्मानपूर्वक आज बाघ का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत के असली कारणों का खुलासा अब फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।
(इनपुट - अमित सिंह)
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