1. Hindi News
  2. मध्य-प्रदेश
  3. शिप्रा नदी के घाटों का बुरा हाल, गंदगी के चलते 5 मिनट खड़ा होना भी मुश्किल, वीडियो वायरल

शिप्रा नदी के घाटों का बुरा हाल, गंदगी के चलते 5 मिनट खड़ा होना भी मुश्किल, वीडियो वायरल

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Oct 05, 2026 10:24 pm IST,  Updated : Oct 05, 2026 10:24 pm IST

शिप्रा नदी के घाटों पर इतनी गंदगी है कि यहां पांच मिनट खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। घाटों के आसपास गंदगी के साथ-साथ दुर्गंध भी फैली हुई है।

शिप्रा नदी के घाटों पर गंदगी ही गंदगी- India TV Hindi
शिप्रा नदी के घाटों पर गंदगी ही गंदगी Image Source : STRINGER INPUT

मध्य प्रदेश के देवास से लगभग 12 किलोमीटर दूर इंदौर रोड पर स्थित शिप्रा नदी को 'मोक्षदायिनी' माना जाता है यानी वह नदी जो मोक्ष दिलाती है। अमावस्या के पास आते ही हजारों श्रद्धालुओं के पवित्र डुबकी लगाने और अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करने की उम्मीद है, जिसके बाद वे देवी दुर्गा की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए घर लौटेंगे। फिर भी, जो नदी श्रद्धालुओं को पवित्र करती है। वह अब खुद ही शुद्धिकरण के लिए गुहार लगाती हुई दिख रही है। शिप्रा नदी के घाटों पर इतनी गंदगी है कि यहां पांच मिनट खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। घाटों के आसपास गंदगी के साथ-साथ दुर्गंध भी फैली हुई है।

शिप्रा के घाटों पर फैली गंदगी से लोग परेशान

घाटों का नजारा बहुत परेशान करने वाला है। जमा हुआ कचरा, बदबू और साफ तौर पर प्रदूषित पानी की वजह से वहां पांच मिनट भी खड़े रहना मुश्किल हो जाता है। पूजा-पाठ के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि खुले नालों का गंदा पानी सीधे शिप्रा में गिर रहा है, जबकि किनारों पर गंदगी फैली हुई है और पानी में तैर रही है। कई लोगों के मन में यह दुखद सवाल है: ऐसे हालात में पूर्वजों को पवित्र चीजें कैसे अर्पित की जा सकती हैं?

शिप्रा नदी की सफाई पर उठे सवाल

नदी के किनारे दूसरी जगहों पर भी ऐसी ही चिंताएं जताई गई हैं। हाल ही में श्राद्ध पक्ष के दौरान आई रिपोर्टों में उज्जैन के सिद्धवट घाट पर पानी को लगातार दूसरे महीने नहाने के लिए 'संतोषजनक नहीं' पाया गया। गंदे नालों का पानी इसके प्रदूषण की एक बड़ी वजह है। पहले की जाचों में भी शिप्रा के कई घाटों पर बैक्टीरिया का बहुत ज्यादा संक्रमण पाया गया है, जिससे वहां का पानी नहाने के लिए असुरक्षित हो गया है। जब शिप्रा पंचायत सचिव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव के बाद नदी की सफाई की गई थी और आने वाले त्योहारों से पहले एक और सफाई अभियान चलाया जाएगा, लेकिन उस जगह की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। अगर सच में सफाई हुई थी तो घाटों से अब भी कचरे की बदबू क्यों आ रही है? नदी में सीवेज का पानी क्यों गिर रहा है?

शिप्रा नदी के घाटों की बदहाल की वजह

त्योहार से पहले सफाई करना कोई समाधान नहीं है। यह बस कुछ समय के लिए समस्या को छिपाने जैसा है। असल जरूरत है लगातार गाद निकालने की, नालियों का पानी नदी में गिरने से सख्ती से रोकने की, घाटों पर कचरा इकट्ठा करने की और स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने की। अधिकारियों ने माना है कि शिप्रा को प्रदूषण-मुक्त रखना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि प्रदूषित नालियां और ऊपर की तरफ से आने वाला पानी इस समस्या को और बढ़ाते हैं। जैसे-जैसे अमावस्या पास आ रही है। श्रद्धालु आस्था के साथ वहां पहुंचेंगे। प्रशासन को यह पक्का करना होगा कि उन्हें साफ-सुथरे घाट और सम्मानजनक माहौल मिले न कि ऐसी पवित्र नदी जो गंदगी के बीच खुद की मुक्ति के लिए संघर्ष कर रही हो।

(स्ट्रिंगर- अरविंद चोकसे)

ये भी पढ़ें - यमुना में 80 % गंदगी दिल्ली की, 15 साल लगेंगे साफ करने में: उमा भारती

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। मध्य-प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।