गर्मियों की छुट्टियों में लोग घूमने फिरने की खूब प्लानिंग करते हैं। कई लोग हिल स्टेशन जाना पसंद करते हैं तो कई लोगों को इतिहास से जुड़ी रोचक जगहें पसंद आती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की खूबसूरत वादियों में एक ऐसी जगह है जो ऐतिहासिक भी है और हिल स्टेशन का भी फील देती है। हम जिस जगह की बात कर रहे हैं ये सतपुड़ा रेंज में बसा तामिया हिल्स है। शहर की भागदौड़ और शोर-शराबा बिल्कुल दूर ये जगह प्राकृतिक सुंदरता अपार भंडार है। अगर पचमढ़ी आपको पसंद आता है, लेकिन वहां बढ़ रही भीड़ के चलते नहीं जाना चाहते तो आप तामिया को अपना अगला टूरिस्ट डेस्टिनेशन बना सकते हैं। कहा जाता है कि ये पचमढ़ी से भी ज्यादा खूबसूरत है और हरियाली के बीच पहाड़ों का भी मजा आपको मिलेगा, गर्मी में यही सबसे राहत की बात भी है।
सतपुड़ा की वादियों में बसा हिल स्टेशन
मध्य प्रदेश का तामिया कोई ऐसा हिल स्टेशन नहीं है जहां पर्यटकों की भारी भीड़ हो या ट्रैफिक जाम मिले। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा तामिया एक शांत, अनटच्ड और बेहद खूबसूरत कोना है। यहां हर वक्त पहाड़ों पर धुंध छाई रहती है और मौसम इतना सुहाना होता है कि आपका मन यहीं बस जाने को करेगा। अगर आप कुछ दिन शांति से बिताना चाहते हैं और प्रकृति को करीब रहना चाहते हैं तो आप यहां जाने की तैयारी कर सकते हैं।

कहां ठहरें?
तामिया की खूबसूरती का पूरा मजा तब आता है, जब आप यहां घाटी के किनारे बने कॉटेज या रिसॉर्ट में रुकें। सुबह जब आपकी आंख खुलेगी तो खिड़की के बाहर सिर्फ धुंध ही नजर आएगी। बाहर निकलकर आप आई लेवल पर बादलों का अनुभव कर पाएंगे। आप बालकनी या फिर गार्डन एरिया में बैठकर चाय की चुस्की ले सकते हैं। पहाड़ों के बीच निकलते सूरज की झलक भी आपको यहां देखने को मिल जाएगी। ये अहसास आपको दिल्ली-मुंबई जैसे किसी बड़े शहर में देखने को नहीं मिलेहा। अगर वाइल्ड लाइफ लवर और बर्ड वॉचर हैं तो आपको इस इलाके में चिड़ियों की चहचहाहट और कई जंगली जानवारों की आहट भी सुनाई दे सकती हैं।
पातालकोट घाटी और आदिवासियों का डेरा
तामिया के पास ही एक बेहद अनोखी जगह है जिसे पातालकोट कहा जाता है। ये पहाड़ों के बीच बनी बड़ी वैली है। ये ऊपर से देखने में बिल्कुल खोड़े की नाल यानी हॉर्सशू जैसी ही दिखती है। यह इतनी गहरी है कि इस इलाके कुछ गांवों में सूरज की रोशनी भी बहुत देर से पहुंचती है। इस घाटी के अंदर बैगा और गोंड आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। ये लोग आज भी प्रकृति से जुड़े हुए हैं और इनकी जिंदगी भी पूरी तरह से प्रकृति पर ही निर्भर है। इनके गांवों में जाना, इनके मिट्टी के घरों को देखना और इनका सादा खाना चखना आपको एक अलग ही दुनिया की सैर करा सकता है। इनका रहन-सहन और खानपान आम लोगों से बिल्कुल अलग है।

खूबसूरत व्यू-पॉइंट्स से नजारे
तामिया में दलेल सनराइज पॉइंट, चिमटीपुर और वल्चर पॉइंट जैसी कई जगहें हैं, जहां से पूरी घाटी का नजारा साफ नजर आता है। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं या फिर आपको पहाड़ों को निहारना काफी पसंद आता है तो ये पॉइंट्स बेस्ट हैं। वल्चर पॉइंट पर आपको आसमान में ऊंचे उड़ते हुए गिद्ध और चील देखने को मिल जाएंगे, वहीं चिमटीपुर से चारों तरफ फैले घने जंगल बेहद खूबसूरत लगते हैं।
जंगल के सन्नाटे में पैदल घूमना
ऊंचे-ऊंचे साल और सागौन के पेड़ों के बीच पैदल चलना अपने आप में एक थेरेपी जैसा है। सूखी पत्तियों पर चलने की आवाज, गीली मिट्टी की खुशबू और जंगल का सन्नाटा आपको पसंद आएगा। अगर आप जंगल के रास्तों को सुरक्षित तरीके से घूमना चाहते हैं या कोई गाइड चाहते हैं तो आप 'मोटल तामिया' से भी मदद ले सकते हैं, उनके नंबर हैं: 78798 02021, 7803003003। वे पर्यटकों को जंगल की सैर कराने में मदद करते हैं। (ये जानकारी एमपी टूरिज्म के अनुसार है।)

आस-पास के झरने और अनोखी जगहें
तामिया के आस-पास घूमने के लिए कई और भी बढ़िया जगहें हैं। तामिया से करीब 47 किलोमीटर दूर यह झरना बारिश के दिनों में देखने लायक होता है, जब पानी कई धाराओं में बटकर नीचे गिरता है। जंगल के बीच छिपी हुई यह एक छोटी और शांत गुफा है, जहां एक प्राचीन मंदिर है। यहां का माहौल बहुत सुकून देने वाला है। यह एक बहुत ही अजीब और जादुई जगह है जहाँ ज़मीन से अपने आप गर्म पानी निकलता रहता है। इस ठंडे इलाके में उबलते पानी के कुंड देखना हैरान करता है। करीब 27 किलोमीटर दूर छिपा यह झरना एक शांत तालाब में गिरता है, जहां आप आराम से पानी में पैर डुबोकर बैठ सकते हैं।
यहां जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
वैसे तो आप यहां साल में कभी भी जा सकते हैं, लेकिन जुलाई का महीना यानी मानसून की शुरुआत यहां जाने के लिए सबसे बेस्ट है। इस समय पूरी घाटी हरी हो जाती है, झरने पानी से भर जाते हैं और बादल आपके इतने करीब आ जाते हैं मानो आप आसमान में घूम रहे हों।
तामिया हिल्स का इतिहास
बता दें, तामिया के जंगलों और चट्टानों को वैज्ञानिकों द्वारा लगभग 2500 मिलियन वर्ष यानी 25 करोड़ से भी अधिक पुराना माना जाता है। तामिया को मुख्य रूप से अंग्रेजों द्वारा एक हिल स्टेशन के रूप में बसाया गया था।

तामिया हिल्स जाने घूमने का सबसे अच्छा समय
वैसे तो तामिया में न ज्यादा गर्मी होती है और न सर्दी, लेकिन फिर भी मानसून का वक्त यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। आप यहां जून से सितंबर के महीने में घूमने जा सकते हैं। इस मौसम में खूब हरियाली, बादलों का खूबसूरत नजारा और पहाड़ों के बीच मूव करते बादल और उनमें से निकलती सूरज की किरणें आपका मन मोह लेंगी।
कैसे आएं तामिया हिल्स?
- तामिया का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट नागपुर शहर में है, जो यहां से 185 किलोमीटर दूर है। यह एयरपोर्ट देश के दूसरे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- सबसे नजदीकी स्टेशन नागपुर रेलवे स्टेशन है, जो नागपुर से 178 किलोमीटर दूर है।
- मध्य प्रदेश के सभी शहरों से सड़क मार्ग द्वारा तामिया पहुँचना आसान है। आप भोपाल, नागपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा और पिपरिया से बस या टैक्सी ले सकते हैं जो आपको सीधे तामिया पहुंचा देंगी।
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