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कहां है दुनिया की सबसे विशाल 1500 साल पुरानी नटराज मूर्ति? 200 टन वजन और 29 फीट की ऊंचाई, किसी अजूबे से नहीं है कम

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Jun 08, 2026 01:14 pm IST,  Updated : Jun 08, 2026 01:14 pm IST

क्या आप दुनिया की सबसे बड़ी नटराज मूर्ति के बरे में जानते हैं? ये मूर्ति कहीं और नहीं बल्कि भारत के मध्य प्रदेश में ही है। ये मूर्ती किसी अजूबे से कम नहीं है और इसका इतिहास सालों पुराना है।

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नटराज। Image Source : @TRUE_SHROTRIYA/X

भारत में कई ऐसी मूर्तियां हैं जो देश और दुनिया भर के लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं हैं और इन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। आज आपको ऐसी ही एक मूर्ती के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उदयपुर में मौजूद है। ये नटराज की सबसे विशाल मूर्ति है। इसका इतिहास 1500 साल पुराना है। ये प्राचीन मूर्ति विशाल चट्टान में तराश कर बनाई गई थी। इस मूर्ति की बनावट भी काफी अलग है। इसका वजन और लंबाई-चौड़ाई हमेशा ही चर्चा का केंद्र बनी रहती है। खास तौर पर ये मूर्ति शिव भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। बता दें, नटराज भगवान शिव का ही रूप हैं।

1500 साल पुराना है नटराज मूर्ति का इतिहास

कुछ साल पहले मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ही पत्थर से बनी भगवान नटराज की लगभग 1500 साल पुरानी मूर्ति मिली, जो रहस्यमय तरीके से खड़ी करने के बजाय जमीन पर ही छोड़ दी गई थी। INTACH के राज्य संयोजक मदन मोहन उपाध्याय ने कहा था, 'यह दुनिया की सबसे बड़ी नटराज मूर्ति है। इन खंडहरों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनने की बड़ी संभावना है।'विदिशा जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और राज्य पुरातत्व विभाग भी इस समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के उपायों पर काम कर रहे हैं।

मूर्ति की लंबाई, चौड़ाई और वजन

9 मीटर यानी 29 लंबी और 4 मीटर यानी 13 फीट चौड़ी यह विशाल मूर्ति एक ही पत्थर से बनाई गई थी। यह इतनी बड़ी है कि इसकी पूरी तस्वीर कभी एक फ्रेम में नहीं आ पाई, इसलिए इसकी तस्वीरें INTACH ने ड्रोन के इस्तेमाल से लीं। ड्रोन से ही पहली बार पता चला कि यह नृत्य करते हुए शिव की मूर्ति है। पिछले कुछ समय से INTACH उदयपुर में काम कर रहा है। शिलाखंड पर उकेरी गई इस प्रतिमा का वजन लगभग 200 टन के करीब है बीच है, इसके चलते ये सबसे भारी शिव मूर्तियों में भी शामिल है। 

सालों तक रहीं लोगों की निगाहों से दूर

जिस क्षेत्र में ये मूर्ति है यह जगह पूरे मध्य प्रदेश में नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के लिए जानी जाती है। ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा संरक्षित यह मंदिर बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है, खासकर महाशिवरात्रि के दौरान। इस जगह और भगवान शिव के नीलकंठेश्वर मंदिर के निर्माण की कहानी शिलालेखों में लिखी है, जिन्हें अब ग्वालियर संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। उदयपुर के प्रसिद्ध नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से करीब 1.5 किलोमीटर दूर पहाड़ी की तलहटी में ये भव्य मूर्ति है, जिसके बारे में लंबे वक्त तक कोई नहीं जानता था और ये लोगों से काफी वक्त तक छिपी रही। सालों तक इसके बारे में कोई सही जानकारी नहीं थी, ऐसे में स्थानीय लोग इसको रावणटोल के नाम से जानते थे। एक वक्त ऐसा भी था जब इस विशाल मूर्ति को लोग सिर्फ खंभा समझते थे।

मूर्ति का आकार

नटराज की इस 6 भुजाओं वाली प्रतिमा में जटामुकुट और उनका चेहरा करीब 6 फीट में उकेरा गया है। इस मूर्ति में गौर से देखें तो भगवान शिव रौद्र अवतार में हैं और एक राक्षस उनके पैर के नीचे ही दबा दिखाई देगा। गले में नाग और हाथों में दंड, त्रिशूल, डमरू और षटखंड जैसी चीजें नजर आ रही हैं। इससे साफ है हो रहा है कि ये भगवान शिव की अभयमुद्रा है। शुरुआत में इतिहासकारों को लगा कि ये मूर्ति आस-पास की चट्टानों को काटकर बनाई गई होगी, लेकिन जांच में पता चला कि ऐसा नहीं हैं। राज्य पुरातत्व विभाग ने जब खुदाई कराई तो चौंकने वाले तथ्य सामने आए और पता चला कि इस मूर्ति को कहीं और से लाया गया है। आस-पास की पहाड़ियों से इसके कोई भी गुण नहीं मिले।

कभी स्थापित नहीं हो पाई ये मू्र्ति

यह शहर परमार राजा उदयादित्य ने लगभग 1059 ईस्वी में बसाया था। नटराज की मूर्ति इन खंडहरों के समय से भी पहले की है। कहा जाता है कि इस मूर्ति को स्थापित करने की योजना रही होगी, इसी के चलते इसे किसी सुदूर इलाके से लाया गया था। इसके लिए चबूतरा भी बनाया गया ता जो आज भी मौजूद है, लेकिन किसी अज्ञात वजय से ये स्तापित नहीं हो पाई।

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