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किन्नर अघोरी ने जलती चिता से शव का मांस निकालकर खाया, इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो, महामंडलेश्वर ने जताई आपत्ति

 Written By: Shakti Singh
 Published : Aug 31, 2026 02:43 pm IST,  Updated : Aug 31, 2026 02:43 pm IST

किन्नर अघोरी का वीडियो सामने आने के बाद महामंडलेश्वर ने आपत्ति जताई है। उन्होंने वीडियो में नजर आ रहे अघोरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना कि इस तरह की क्रियाओं को गुप्त रखना जरूरी होता है। इसका वीडियो शेयर करना गलत है।

Aghori Video- India TV Hindi
अघोरी ने वीडियो में शव से मांस खाने का दावा किया Image Source : REPORTER INPUT

उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो किन्नर अखाड़े से जुड़ी काली उर्फ नंद गिरी के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में काली हाथ में तलवार लेकर तांत्रिक क्रिया करती नजर आती हैं। इसके बाद वे जलती चिता के पास जाकर तलवार से मानव अवशेष निकालती और उसे खाने का दावा करती दिखाई देती हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है और कार्रवाई की मांग हो रही है। समाज की मर्यादा के खिलाफ संत समाज और आम लोगों में श्मशान घाट की जलती चिता से मांस खाने के वीडियो को लेकर नाराजगी है। 

वीडियो वायरल होने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उज्जैन का श्मशान घाट सुरक्षित नहीं है। यहां आए दिन तंत्रिका तंत्र क्रिया करने के लिए शवों के साथ छेड़छाड़ करते हैं। छेड़छाड़ करने का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें किन्नर तांत्रिक तलवार से शव को विच्छेद कर मांस खाते दिखाई दे रही है।

महामंडलेश्वर ने जताई आपत्ति

महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने कहा कि अघोर साधना की अपनी मर्यादाएं हैं और तांत्रिक क्रियाओं को सार्वजनिक करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रदर्शन वैदिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक, निजी प्रसिद्धि और प्रचार के लिए ऐसी गतिविधियों का प्रसारण करना समाज में गलत संदेश देता है। इस प्रकार का कृत्य करने वाला निश्चित तौर पर नरभक्षी हो सकता है। प्रशासन को कार्यवाही करना चाहिए।

क्या है नियम?

महामंडलेश्वर शैलेश आनंद गिरि ने कहा, "स्पष्ट उल्लेख है। आगम निगम तंत्र जो है, शिव ने शक्ति को जो कहा या शक्ति ने जो शिव को कहा इनके ऊपर आगम निगम तंत्र की व्याख्या है। उन व्याख्याओं के अंदर स्पष्ट किया गया अद्वैत वेदांत के अंदर कि जितना भी पवित्रता है, अपवित्रता है, जितना भी स्वीकारोक्त यज्ञ है, इन सब के अंदर कोई भेद नहीं है। समस्त भेदों को खत्म करने के लिए ही अद्वैत प्रतिपादन हुआ। उसी मार्ग के ऊपर चलकर के आगम निगम तंत्र के तहत अघोर ओघड़ इन मार्गों का भी निर्धारण हुआ। इसमें कोई संशय नहीं है। किंतु स्पष्ट रखिएगा अघोरी की अपनी मर्यादाएं हैं। उन मर्यादाओं के तहत कभी भी उन क्रियाओं को गोपनीय रखना जरूरी है। उनको सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जो भी साधक सार्वजनिक करता है वो कहीं ना कहीं काल नेमी साधक हो सकता है। कहीं ना कहीं पद भ्रष्ट साधक हो सकता है।"

डिस्कवरी चैनल पर भी हुआ था विवाद

महामंडलेश्वर ने कहा, "आप इस बात को समझिएगा। कुछ वर्षों पूर्व डिस्कवरी चैनल और अन्य इस प्रकार के खोजी चैनलों के द्वारा भारतीय वैदिक तंत्रात्मक अभिव्यक्ति को दर्श करने के लिए दृश्य बनाने के लिए रिकॉर्डिंग्स की गई थी। किंतु उनको भी अंततवा हिंदू संतों के कहने पर ही ब्लर कर दिया गया था। उन्हें छुपा दिया गया था। यह बेहद गोपनीय साधन है। इसका जो प्रदर्शन की बात कर रहा है, वह हमारे वैदिक हिंदू धर्म का अपमान कर रहा है। वो उसे कहीं ना कहीं अपने व्यापारिक या निजी प्रतिष्ठा को वृद्धि करने वाला एक औजार मान रहा है। यह उचित नहीं है। इस प्रकार का कृत जो हो सकता है, जो कि मानो मांस के भक्षण का दशंकन करने वाला हो। मानव मांस को चाहे प्रकात्मक रूप से भक्षण करने वाला हो उसे आज का आधुनिक समाज कदापि मानवीय नहीं मानता है। उसे एक नर पिशाच अभिव्यक्ति मानता है। इस बात को समझना होगा। बहुत तेजी के साथ में इस प्रकार की कुछ चेष्टाएं हो रही है। इसको शासन में संज्ञान में लेना होगा। मैजिकल इंस्ट्रूमेंटेशन एक्ट हो या फिर किसी भी प्रकार का हो। आपको समस्त उन संतों के ऊपर जो चमत्कारों की व्याख्या करते हैं, घृणाओं का प्रसार करते हैं। भेदभाव का प्रसार करते हैं। भय का प्रसार करते हैं। उन सबको भी आपको नियंत्रित करना होगा। यह आधुनिक भारत है। इसके अंदर यह विचार नहीं चल सकते। इस प्रकार की चेष्टाएं नहीं चल सकती।"

(उज्जैन से प्रेम डोडिया की रिपोर्ट)

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