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मौत के 12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार, मेजर हर्षित ने दी बहन को मुखाग्नि, पुलिस ने मौत वाली जगह जाकर की जांच

 Reported By: Anurag Amitabh, Edited By: Shakti Singh
 Published : May 24, 2026 08:34 pm IST,  Updated : May 24, 2026 08:34 pm IST

दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम करने के बाद उसकी मौत वाली जगह जाकर जांच की। इस दौरान पुलिस की टीम भी उनके साथ थी। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

Twisha last riots- India TV Hindi
ट्विशा शर्मा को मुखाग्नि देते भाई हर्षित Image Source : PTI

मध्य प्रदेश के भोपाल में मौत के 12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार हुआ। भदभदा विश्राम घाट पर मेजर हर्षित ने बहन को मुखाग्नि दी। इससे पहले रविवार सुबह दिल्ली एम्स के 4 डॉक्टरों की टीम ने ट्विशा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम किया। इसमें चार घंटे लगे। दोपहर में पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद पुलिस ने ससुराल जाकर मौत वाली जगह जांच की। पुलिस के साथ एम्स डॉक्टर्स की टीम भी मौजूद थी। इस दौरान आत्महत्या वाली जगह का परीक्षण किया गया। पुलिस और डॉक्टर्स की टीम ने स्पॉट वेरिफिकेशन भी किया।

33 वर्षीय ट्विशा मिस पुणे रह चुकी हैं। इनका शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में ससुराल वालों के मकान में फंदे से लटका हुआ मिला था। चिता को मुखाग्नि दिए जाते ही परिवार के सदस्य फूट-फूटकर रोने लगे।

क्यों हुआ दूसरा पोस्टमार्टम

ट्विशा के परिजनों ने आरोप लगाया था कि शुरुआती जांच में उसके शरीर में मौजूद कई चोटों को नजरअंदाज किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अपील की थी, जिसे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इसी वजह से अंतिम संस्कार में देरी हुई। इस दौरान मुख्य रूप से साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उन चोटों की जांच पर फोकस किया गया, जिन्हें लेकर परिजनों ने आरोप लगाया था। ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने बेटी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ''वह मां की तरह हमारी देखभाल करती थी। उसके बिना कैसे जी पाएंगे, पता नहीं। यह मामला आने वाले समय में एक उदाहरण बनेगा। उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान लिए जाने से न्याय की उम्मीद जगी है।'' 

अंतिम संस्कार के दौरान बेसुध हुईं मां

अंतिम संस्कार की मां बेसुध होने की स्थिति में पहुंच गई थीं। पास में मौजूद महिलाओं ने उन्हें पास के लॉन में ले जाकर चेहरे पर पानी छिड़का। ट्विशा के परिवार ने कहा कि इंतजार के कारण उन्हें हिंदू परंपराओं का उल्लंघन करना पड़ा। हिंदू परंपराओं के अनुसार मौत के 13 दिन के अंदर अंतिम संस्कार और तेरहवीं कर दी जाती है। मेजर हर्षित शर्मा ने कहा कि ट्विशा भावुक, स्नेही और देखभाल करने वाली लड़की थी। उन्होंने बहन की तुलना सुबह की पहली किरण से की, जो पूरे दिन को रोशन कर देती है। 'वर्दी फाउंडेशन' के संस्थापक सेवानिवृत्त मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने कहा, ''हम आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ेंगे।''

ससुराल पक्ष पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप

ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। वहीं, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं। ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह पूर्व जज हैं और पति समर्थ वकील हैं। इस वजह से यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। गिरिबाला सिंह पर बेटे और खुद को बचाने के लिए अपनी पहचान का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। उच्चतम न्यायालय ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। इसी दिन हाईकोर्ट में गिरिबाला सिंह की जमानत पर भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी, जिसका मध्य प्रदेश सरकार ने विरोध किया है। वहीं, समर्थ सिंह पुलिस रिमांड में हैं।

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