लातूर: महाराष्ट्र में लातूर महानगरपालिका चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने बड़ा और चौंकाने वाला राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने इस बार लातूर शहर में कुल 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिसमें से 9 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। भाजपा के इस कदम को “मुस्लिम फॉर्म्युला” के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने स्थानीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि पार्टी केवल जाति या धर्म की राजनीति नहीं करती, बल्कि कार्यक्षमता, जनसंपर्क और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है। इसी सोच के तहत लातूर शहर के विभिन्न प्रभागों से मुस्लिम समाज के सक्रिय, जमीनी स्तर पर काम करने वाले और जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले चेहरों को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी का मानना है कि इन उम्मीदवारों के जरिए अल्पसंख्यक समाज तक पहुंच मजबूत होगी और विकास की राजनीति को नई दिशा मिलेगी।
बीजेपी नेताओं ने दिया ये तर्क
लातूर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना केवल चुनावी गणित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति पर चल रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि लातूर में मुस्लिम समाज भी अब विकास, सुरक्षा और स्थिर प्रशासन को लेकर गंभीर है और भाजपा की नीतियों पर भरोसा जता रहा है।
विपक्षी दलों का बिगड़ सकता है गणित
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा का यह कदम कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि परंपरागत रूप से मुस्लिम वोट बैंक इन दलों के साथ माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा द्वारा 9 मुस्लिम उम्मीदवार उतारना विपक्षी दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां स्थानीय मुद्दे, बुनियादी सुविधाएं और विकास प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं।
सभी 70 सीटों पर बीजेपी लड़ रही है चुनाव
भाजपा कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि सभी 70 सीटों पर संगठन पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरेगा और जनता के बीच विकास कार्यों, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर जाएगा। कुल मिलाकर, लातूर भाजपा का यह मुस्लिम फॉर्म्युला आने वाले चुनाव में क्या रंग दिखाएगा, यह तो नतीजों के बाद ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल इस फैसले ने लातूर की सियासत में हलचल जरूर पैदा कर दी है।
रिपोर्ट- आसिफ पटेल, लातूर