20 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और सोमवार का दिन है। सप्तमी तिथि सोमवार को पूरा दिन पार करके भोर 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। 20 जुलाई को शाम 6 बजकर 38 मिनट तक शिव योग रहेगा। शिव योग में किय गये सभी कार्यों में, विशेषकर कि मंत्र प्रयोग में सफलता मिलती है। साथ ही सोमवार को शाम 7 बजकर 10 मिनट तक हस्त नक्षत्र रहेगा। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते सोमवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
20 जुलाई 2026 का पंचांग
- आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि- 20 जुलाई 2026 को पूरा दिन पार करके भोर 4 बजकर 3 मिनट तक
- शिव योग- 20 जुलाई को शाम 6 बजकर 38 मिनट तक
- हस्त नक्षत्र- 20 जुलाई 2026 को शाम 7 बजकर 10 मिनट तक
20 जुलाई 2026 का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:44 ए एम से 05:28 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:11 पी एम
- विजय मुहूर्त - 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:17 पी एम से 07:39 पी एम
- अमृत काल- 12:55 पी एम से 02:35 पी एम
20 जुलाई 2026 का अशुभ समय
- राहुकाल- 07:49 ए एम से 09:28 ए एम
- यमगण्ड- 11:06 ए एम से 12:45 पी एम
- आडल योग- 06:11 ए एम से 11:34 ए एम
- विडाल योग - 11:34 ए एम से 07:09 पी एम
- दुर्मुहूर्त- 01:11 पी एम से 02:04 पी एम
- गुलिक काल- 02:23 पी एम से 04:02 पी एम
राहुकाल का समय
- दिल्ली- सुबह 07:19 से सुबह 09:02 तक
- मुंबई- सुबह 07:50 से सुबह 09:28 तक
- चंडीगढ़- सुबह 07:17 से सुबह 09:01 तक
- लखनऊ- सुबह 07:07 से सुबह 08:49 तक
- भोपाल- सुबह 07:25 से सुबह 09:06 तक
- कोलकाता- सुबह 06:43 से सुबह 08:23 तक
- अहमदाबाद- सुबह 07:45 से सुबह 09:25 तक
- चेन्नई- सुबह 07:27 से सुबह 09:03 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
- सूर्योदय- सुबह 5: 34 बजे
- सूर्यास्त- शाम 7: 18 बजे
हस्त नक्षत्र
आकाशमंडल में कुल 27 नक्षत्र स्थित होते हैं। उन्हीं में से हस्त तेरहवां नक्षत्र है। शुभ नक्षत्रों की श्रेणी में से एक है। इस दौरान किये गये सभी कार्यों का शुभ फल प्राप्त होता है। हस्त का अर्थ होता है- हाथ और इसी के अनुसार हस्त नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह हमारी हथेली को माना जाता है, जो कि सीधे तौर पर हमारे भाग्य को दर्शाती है। हस्त नक्षत्र हमारे भाग्य को उज्ज्वल करने वाला है। हस्त नक्षत्र को हमारे जीवन में परिश्रम करने की क्षमता, विशेषकर कि हाथ की कला से किये जाने वाले कार्यों के साथ जोड़कर देखा जाता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चन्द्रमा हैं। अतः हस्त नक्षत्र के दौरान चंद्र देव की उपासना करना लाभदायक सिद्ध होता है। साथ ही हस्त नक्षत्र में भगवान शंकर की भी पूजा की जाती है। हस्त नक्षत्र के चारों चरण कन्या राशि में आते है लिहाजा इसकी राशि कन्या है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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