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दुबई की जेल में मिली थी 10 साल की सजा, गोपालगंज का लाल 'वसीम' महीनों बाद लौटा वतन; रो पड़ा परिवार

 Published : Jul 19, 2026 01:49 pm IST,  Updated : Jul 19, 2026 02:07 pm IST

दुबई की जेल से गोपालगंज तक का यह सफर सिर्फ एक युवक की वापसी नहीं, बल्कि उम्मीद और भरोसे की मिसाल बन गया है। कई महीनों तक परिवार की आंखों में आंसू थे, लेकिन आज वही आंखें खुशी से छलक रही हैं।

दुबई की जेल से वतन लौटा वसीम- India TV Hindi
दुबई की जेल से वतन लौटा वसीम, सांसद की पहल से परिवार में लौटी खुशियां Image Source : INDIA TV

बिहार के गोपालगंज के एक परिवार के लिए आज का दिन किसी त्योहार से कम नहीं है। दुबई में 10 साल की सजा का सामना कर रहे जिले के युवक वसीम अकरम आखिरकार अपने वतन लौट आए हैं। कई महीनों की बेबसी, इंतजार और दुआओं के बाद बेटे की घर वापसी से परिवार की आंखों में खुशी के आंसू हैं। वतन लौटते ही वसीम सबसे पहले गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन से मिलने पहुंचे। सांसद ने उन्हें गले लगाया, अपने हाथों से मिठाई खिलाई और कहा कि यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे गोपालगंज और देश के लिए खुशी का पल है।

रोजगार की तलाश में गोपालगंज के थावे प्रखंड के इंदरवा रफी गांव से दुबई गए वसीम अकरम ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह वहां की जेल में पहुंच जाएंगे। 6 मार्च को दुबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। आरोप था कि ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान उन्होंने प्रतिबंधित क्षेत्र का वीडियो बना लिया था। मामला अदालत तक पहुंचा और उन्हें 10 साल की सजा सुना दी गई। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां-बाप की रातों की नींद उड़ गई और हर किसी के मन में सिर्फ एक सवाल था-क्या वसीम कभी वापस लौट पाएंगे?

निराशा के इसी दौर में परिवार ने गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन से गुहार लगाई। सांसद ने बिना देर किए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और पूरे मामले को गंभीरता से उठाया। भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और दुबई प्रशासन के बीच लगातार समन्वय हुआ। कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और आखिरकार वह दिन आया, जब वसीम की रिहाई का रास्ता साफ हुआ और उन्हें सुरक्षित भारत वापस भेज दिया गया।

वतन लौटते ही वसीम सीधे सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन के आवास पहुंचे। यहां सांसद ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया और अपने हाथों से मिठाई खिलाई। इस भावुक पल ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। सांसद ने कहा कि जब उन्हें इस घटना की जानकारी मिली थी, तभी उन्होंने तय कर लिया था कि हर संभव प्रयास कर जिले के इस बेटे को उसके परिवार तक वापस पहुंचाना है।

सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने इस बारे में बात करते हुए बताया, 'जैसे ही हमें पता चला कि गोपालगंज का एक युवक दुबई में कानूनी परेशानी में फंस गया है, हमारी चिंता बढ़ गई थी। हमने तत्काल विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और दुबई प्रशासन के सहयोग से आज वसीम अपने परिवार के बीच हैं। यह पूरे देश के सामूहिक प्रयास और विश्वास की जीत है।'

सांसद से मुलाकात के दौरान वसीम ने जेल में बिताए उन कठिन दिनों की कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा कि कई बार उम्मीद टूटने लगी थी, लेकिन उन्हें विश्वास था कि उनका देश उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा। वसीम ने सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन, भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और उन सभी अधिकारियों का आभार जताया जिन्होंने उनकी रिहाई के लिए लगातार प्रयास किए।

वसीम अकरम की यह वापसी सिर्फ एक युवक की घर वापसी नहीं, बल्कि उम्मीद, भरोसे और सामूहिक प्रयास की जीत है। यह कहानी बताती है कि यदि समय पर पहल हो और सरकार, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर काम करें, तो विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की भी प्रभावी मदद संभव है। कई महीनों के इंतजार के बाद आज वसीम के घर में फिर से खुशियां लौटी हैं और परिवार के चेहरे पर मुस्कान वापस आई है।

(रिपोर्ट- अयाज अहमद)

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