मुंबई में कचरे और गंदगी की स्थिति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC को कड़ी फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने कहा कि पूरा शहर कचरे और गंदगी से भरा नजर आ रहा है और पालिका की व्यवस्था निष्क्रिय दिखाई दे रही है। अगर वार्ड अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि कचरे की समस्या को नजरअंदाज करके मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कैसे कहा जा सकता है?
सफाई अभियान की SOP पेश करने का निर्देश
कोर्ट ने BMC को आखिरी मौका देते हुए सभी 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था देखने वाले अधिकारियों की सूची तथा सफाई अभियान की SOP पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी सड़क पर कचरा या गंदगी मिलती है और उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार पाए जाते हैं, तो ऐसे अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों पर झूठे आश्वासन देने और जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।
सिंगापुर का दिया उदाहरण
मामले की सुनवाई कांजूर डंपिंग ग्राउंड से होने वाले वायु प्रदूषण और अन्य समस्याओं को लेकर दायर याचिकाओं पर हुई। कोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद से लोगों में जागरूकता बढ़ाने का सुझाव भी दिया। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई के लिए कोर्ट ने सिंगापुर के सख्त नियमों का उदाहरण दिया। वहां दोषी व्यक्ति पर 2,000 सिंगापुर डॉलर या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों की सफाई करने का सुधारात्मक आदेश भी दिया जा सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी
बता दें कि इससे पहले पिछली सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस बात पर नाखुशी जताई थी कि लोग भारत में तो कहीं भी कचरा फेंक देते हैं, लेकिन विदेश में नियमों का पालन करते हुए सिर्फ तय जगहों पर ही कचरा फेंकते हैं। अदालत ने सवाल किया कि क्या आजादी और लोकतंत्र की कीमत यही है? न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने नागरिकों और नगर निकाय के अधिकारियों को जागरूक करने की बात कही, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सार्वजनिक सड़कों और जगहों पर कचरा न पड़ा रहे।
कोर्ट ने कहा, ''अगर कोई व्यक्ति साफ-सुथरा माहौल चाहता है, तो समाज के प्रति उसकी यह बुनियादी जिम्मेदारी है कि वह सफाई बनाए रखे। हम चाहते हैं कि नगर निकाय के अधिकारी कार्रवाई करने में सख्ती बरतें।'' उच्च न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें शहर के पूर्वी हिस्से में 'कांजुरमार्ग डंपिंग स्थल' के आसपास रहने वाले लोगों के समक्ष प्रदूषण, लगातार बदबू, गैस उत्सर्जन और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को लेकर चिंता जताई गई थी।
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