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'महिला सहकर्मी के बालों के बारे में गाना गाना या टिप्पणी करना यौन उत्पीड़न है कि नहीं', जानिए बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Mar 21, 2025 07:12 pm IST,  Updated : Mar 21, 2025 07:16 pm IST

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऑफिस में महिला सहकर्मी के बालों को लेकर गाना गाए जाने पर एक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पुणे औद्योगिक न्यायालय के आदेश को भी खारिज कर दिया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट- India TV Hindi
बॉम्बे हाई कोर्ट Image Source : FILE PHOTO PTI

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी को राहत देते हुए कहा कि महिला सहकर्मी के बालों पर टिप्पणी करना और उसके बारे में गाना गाना अपने आप में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न नहीं है। जज संदीप मार्ने ने 18 मार्च के अपने आदेश में कहा कि यदि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपों को सही मान भी लिया जाए तो भी उससे यौन उत्पीड़न के बारे में कोई ‘ठोस निष्कर्ष’ नहीं निकाला जा सकता है। 

अपील को किया गया था खारिज

पुणे में एक बैंक के एसोसिएट क्षेत्रीय प्रबंधक विनोद कछावे ने औद्योगिक अदालत द्वारा जुलाई 2024 में दिए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बैंक की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया गया था। इस रिपोर्ट में उन्हें कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत कदाचार का दोषी ठहराया गया था।

बालों का जिक्र करते हुए गाया था गाना

समिति की रिपोर्ट के बाद, कछावे को उप क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर पदावनत (डिमोशन) कर दिया गया। महिला शिकायतकर्ता के अनुसार, याचिकाकर्ता ने उसके बालों पर टिप्पणी की और उसके बालों का जिक्र करते हुए एक गाना भी गाया। शिकायत में कहा गया है कि एक अन्य मामले में उसने कथित तौर पर अन्य महिला सहकर्मियों की मौजूदगी में एक पुरुष सहकर्मी के निजी अंग के बारे में टिप्पणी की थी। 

कोर्ट ने औद्योगिक न्यायालय के आदेश को भी किया खारिज

हाई कोर्ट ने कहा कि बैंक की शिकायत समिति ने इस बात पर विचार नहीं किया कि याचिकाकर्ता का कथित आचरण यौन उत्पीड़न है या नहीं। कोर्ट ने कहा, ‘यदि घटना से संबंधित आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तो भी यह मानना ​​कठिन हो जाता है कि याचिकाकर्ता ने यौन उत्पीड़न का कोई कृत्य किया है।’’ हाई कोर्ट ने बैंक की सितंबर 2022 की आंतरिक रिपोर्ट के साथ-साथ पुणे औद्योगिक न्यायालय के आदेश को भी खारिज कर दिया। (भाषा के इनपुट के साथ)

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