दिवाली के दौरान पटाखे फोड़ने से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह दिवाली के दौरान पटाखे फोड़ने के लिए निश्चित समय तय करने और सुप्रीम कोर्ट के इस संबंध में जारी निर्देशों को लागू करने पर विचार करे। अदालत का मानना है कि पटाखों के कारण शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का गंभीरता से हो विचार
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और पुलिस विभाग जैसी संबंधित एजेंसियों को भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। खासतौर पर पटाखे फोड़ने के समय को लेकर स्पष्ट व्यवस्था लागू करने की जरूरत है, ताकि त्योहार के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जजों ने 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देशों का उल्लेख किया। ये निर्देश दिल्ली-NCR में त्योहारों के दौरान प्रदूषण के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में भी ऐसे निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता जताई।
दीया मिर्जा के वीडियो से जुड़ा है मामला
दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC की ओर से दिवाली जागरूकता अभियान के तहत अभिनेत्री दीया मिर्जा के एक वीडियो को हटाए जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार किया। इस संबंध में अदालत ने 13 पन्नों का आदेश जारी किया।
जानिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
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