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'पति अकेला नहीं, पत्नी को भी घर और बच्चे का खर्च उठाना होगा'; हाईकोर्ट ने मंथली मेंटेनेंस 50 हजार से घटाकर 25 हजार किया

 Written By: Khushbu Rawal @khushburawal2
 Published : Jul 28, 2026 05:53 pm IST,  Updated : Jul 28, 2026 05:53 pm IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी दोनों कमा रहे हैं, तो घर और बच्चे की पढ़ाई का खर्च भी दोनों को उठाना चाहिए। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शख्स को अपनी पत्नी और बेटे को हर महीने 50 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

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बॉम्बे हाईकोर्ट Image Source : PTI

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि समानता का दावा चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता और अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो घर चलाने और बच्चे की शिक्षा का खर्च दोनों को मिलकर उठाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी अलग रह रही पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए तय मासिक भरण-पोषण राशि कम करते हुए की। जस्टिस एम. एम. साथये की सिंगल बेंच ने पिछले हफ्ते दिए आदेश में फैमिली कोर्ट के जनवरी 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पति को पत्नी और बेटे के लिए प्रति माह 50,000 रुपये भरण-पोषण खर्च देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यह राशि घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी।

कोर्ट ने कहा, ''पति मुंबई के अंधेरी स्थित उस मकान की EMI चुका रहा है, जिसमें पत्नी और बेटा रह रहे हैं, जबकि नवी मुंबई के पनवेल स्थित दूसरे मकान की EMI भी वही भर रहा है। वहीं, वह स्वयं बिहार में रह रहा है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी इन दोनों मकानों की EMI में कोई योगदान नहीं दे रही है।''

पत्नी ने घर बदलने से कर दिया था इनकार

  • पति ने अपनी याचिका में अनुरोध किया था कि मासिक भरण-पोषण की राशि 50,000 रुपये से घटाकर 25,000 रुपये की जाए। उसने पत्नी से बिहार में उसके साथ रहने या कम से कम पनवेल स्थित मकान में रहने का अनुरोध किया था, ताकि वह अंधेरी वाला मकान बेचकर अपना आर्थिक बोझ कम कर सके, लेकिन पत्नी ने इससे इनकार कर दिया।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि पति की इस मांग में कोई अनुचित बात नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बिना EMI चुकाए या उसमें आर्थिक योगदान दिए अंधेरी जैसे महंगे इलाके में रहने की सुविधा चाहती है, तो ऐसे में पति द्वारा पूरे EMI का भुगतान करते हुए भरण-पोषण की राशि कम करने की मांग करना गलत नहीं माना जा सकता।

'पति-पत्नी दोनों कमाते हैं तो खर्च भी बांटें'

कोर्ट ने कहा, "समानता का दावा चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब दोनों पक्ष कमाने वाले हों।" कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पति और पत्नी दोनों कमाते हैं और चाहते हैं कि उनके बच्चे को सर्वोत्तम शिक्षा मिले, तो उसकी पढ़ाई का खर्च भी दोनों को मिलकर उठाना चाहिए।

पहले की तुलना में कम वेतन वाली नौकरी कर रहा पति

पति ने कोर्ट को बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसकी नौकरी चली गई थी और अब वह पहले की तुलना में कम वेतन वाली नौकरी कर रहा है, जिससे वह आर्थिक दबाव में है। कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 महामारी का असर अनेक लोगों के रोजगार और बिजनेस पर पड़ा था, इसलिए पति की कमाई में कमी आने का उचित कारण साफ है। 

वहीं, आपको बता दें कि 6 महीने महले सुप्रीम कोर्ट तलाक के एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा था जिसे खुद कोर्ट ने कहा कि यह एक 'दुर्लभ' समझौता है, क्योंकि पत्नी ने कोई पैसों का दावा नहीं किया था। पत्नी ने एलिमनी लेने से किया मना कर दिया और सास के कंगन तक लौटा दिए

(इनपुट- PTI)

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