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तोते खा गए किसान के अनार, अब सरकार भरेगी मोटा मुआवजा; कोर्ट में 10 साल चला मुकदमा

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Apr 26, 2026 08:30 pm IST,  Updated : Apr 26, 2026 08:30 pm IST

महाराष्ट्र की कोर्ट ने सरकार को एक किसान को मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। दरअसल, किसान का कहना है कि उसके अनार की फसल को तोतों ने बर्बाद कर दिया। मामला मई 2016 का है।

तोतों ने बर्बाद कर दी किसान की अनार की फसल।- India TV Hindi
तोतों ने बर्बाद कर दी किसान की अनार की फसल। Image Source : PIXABAY/REPRESENTATIVE IMAGE

नागपुर: महाराष्ट्र के वर्धा में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक किसान के अनार को तोते ने नुकसान पहुंचा दिया, जो मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया। अब इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, बंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को तोतों द्वारा क्षतिग्रस्त अनार के पेड़ों के लिए एक किसान को मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि ये पक्षी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत "वन्य प्राणी" हैं और राज्य को संपत्ति के नुकसान के लिए नागरिकों की भरपाई करनी होगी। 

तोतों ने अनार के पेड़ों को पहुंचाया नुकसान

न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता की नागपुर पीठ ने कहा कि यदि संरक्षित प्रजातियों के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो वे ऐसे उपायों का सहारा ले सकते हैं जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे अधिनियम का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है जिसमें स्पष्ट रूप से तोतों को शामिल किया गया है। यह आदेश 24 अप्रैल को पारित किया गया था जिसकी प्रति रविवार को उपलब्ध कराई गयी। कोर्ट ने वर्धा जिले के हिंगी गांव के एक किसान महादेव डेकाटे (70) द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभ्यारण्य से आए जंगली तोतों ने उनके अनार के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था और इसके लिए मुआवजे की मांग की थी।

कोर्ट ने सरकार को मुआवजा भरने का दिया आदेश

कोर्ट ने सरकार को 200 पेड़ों को हुए नुकसान के लिए प्रति पेड़ 200 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि अतीत में जारी सरकारी प्रस्तावों में कहा गया है कि मुआवजा केवल तभी दिया जा सकता है जब जंगली हाथी और जंगली भैंसे फलदार पेड़ों को नुकसान पहुंचाएं। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसे प्रस्तावों को जारी करने का उद्देश्य प्रभावित किसानों को उनके नुकसान की भरपाई करना था।

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