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डॉक्टर गैंग का काला खेल: इलाज के बहाने 10 दिन की बच्ची को बेचा, 3 लाख में हुई सौदेबाजी

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Feb 12, 2026 02:49 pm IST,  Updated : Feb 12, 2026 02:49 pm IST

गोंदिया-भंडारा में नवजात तस्करी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यहां एक डॉक्टर गैंग ने 10 दिन की मासूम को इलाज के बहाने नागपुर भेजने का झांसा देकर 3 लाख रुपये में बेच दिया।

नवजात बच्ची की...- India TV Hindi
नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त मामले में एक महिला की गिरफ्तारी। Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के गोंदिया और भंडारा जिले में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 10 दिन की मासूम बच्ची को इलाज के बहाने नागपुर भेजने का झांसा देकर ढाई से तीन लाख रुपये में बेच दिया गया। इस संगीन नवजात तस्करी कांड में गोंदिया के एक डॉक्टर को मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। अब तक एक महिला आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि डॉक्टर समेत 5 आरोपी फरार हैं।

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की सतर्कता से टूटा तस्करी रैकेट

यह सनसनीखेज मामला 2 फरवरी को तब उजागर हुआ, जब महिला एवं बाल विकास विभाग की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना मिली कि भंडारा तहसील के पांढराबोड़ी गांव में एक महिला के घर 10 दिन की नवजात बच्ची है। मौके पर पहुंची समन्वयक टीम ने 44 वर्षीय मालती प्रकाश वाघमारे से पूछताछ की, जिसने बताया कि वह बच्ची गोंदिया से लाई गई है। 

आगे की जांच के लिए मालती वाघमारे इसे 3 फरवरी को भंडारा स्थित बाल कल्याण समिति के समक्ष बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुई।

पुलिस की नाकाबंदी में पकड़ी गई नवजात

इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन ने वरठी पुलिस थाने को लिखित सूचना दी। पुलिस जब पांढराबोड़ी पहुंची तो मालती बच्ची को लेकर कार से फरार हो चुकी थी। कुशारी फाटा परिसर में नाकाबंदी कर पुलिस टीम द्वारा वाहन रोका गया, जहां गोंदिया की रामनगर निवासी पूर्णिमा सतीश धुर्वे (30) के कब्जे में नवजात बच्ची मिली। बच्ची के माता-पिता या किसी वैध दस्तावेज के संबंध में वह कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सकी और इलाज के लिए नागपुर ले जाने की बात कही।

पुलिस ने 10 दिन की नवजात बच्ची को भंडारा के अस्पताल में उपचार हेतु भर्ती कराया और बच्ची के असल माता-पिता की खोज शुरू की।

सफेद कोट के पीछे काला धंधा 

4 फरवरी को बच्ची के असली माता-पिता बाल कल्याण समिति के सामने आए उनके बयान से पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। माता-पिता ने बताया कि यह उनकी तीसरी संतान थी। बच्ची समय से पहले पैदा हुई थी और उसकी हालत गंभीर थी, इसलिए उसे इलाज के लिए गोंदिया के रामनगर स्थित क्लीनिक में डॉक्टर के पास भर्ती कराया गया था। पैसों की कमी बताने पर डॉक्टर ने नागपुर की एक सामाजिक संस्था में मुफ्त इलाज करने का झांसा देकर अपने सहयोगियों के माध्यम से नवजात बच्ची को नागपुर भेजकर इलाज कराने का भरोसा दिलाया।

चिकित्सा पेशे पर दाग, डॉक्टर की भूमिका से उठा तूफान

जांच में सामने आया कि डॉक्टर ने बच्ची को नागपुर न भेजकर अपनी सहयोगी असिस्टेंट गोंदिया निवासी ललेश्वरी नंदकिशोर सादेपाच (39) की मदद से मालती वाघमारे को बेच दिया। सौदे की रकम ढाई से तीन लाख रुपये बताई जा रही है, जिसमें एक लाख रुपये चेक से और शेष नकद दिए गए। इस मामले में वरठी पुलिस थाने में गोंदिया निवासी डॉक्टर उसकी असिस्टेंट ललेश्वरी सादेपाच सहित मालती वाघमारे, पूर्णिमा धुर्वे और उमेश सिंह रामचंद्र गहलोत (48) के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। इनमें से ललेश्वरी सादेपाच को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य सरगना डॉक्टर सहित अन्य आरोपी फरार हैं।

5 फरार आरोपी फरार, 2 टीमें कर रही शिद्दत से तलाश

जांच अधिकारी व उपविभागीय पुलिस अधिकारी शिवम विसापूरे ने बताया कि मुख्य आरोपी डॉक्टर फरार है और उसकी तलाश के लिए दो विशेष पुलिस टीमें रवाना की गई हैं। डॉक्टर की डिग्री को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है और हर पहलू की जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न सिर्फ मानवता को झकझोरने वाला है, बल्कि चिकित्सा पेशे की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि रैकेट की सभी कड़ियों को उजागर कर दोषियों को कानून की कठोरतम सजा दिलाई जाएगी।

(रिपोर्ट- रवि आर्य)

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