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सावधान रहें! रिटायर्ड बैंकर को डिजिटल अरेस्ट कर के 40.90 लाख रुपये की ठगी, आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस और NIA का अधिकारी बताया

 Reported By: Saket Rai Edited By: Subhash Kumar
 Published : May 06, 2026 10:58 am IST,  Updated : May 06, 2026 11:02 am IST

मुंबई में एक और डिजिटल अरेस्ट की घटना सामने आई है। दिल्ली पुलिस और NIA अधिकारी बनकर ठगों ने रिटायर्ड बैंकर से 40.90 लाख रुपये ठगे हैं। पीड़ित को तकरीबन 50 से ज्यादा दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : PTI

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक हैरान करने देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक रिटायर्ड बैंकर को डिजिटल अरेस्ट कर के 40.90 लाख रुपये की ठगी की गई है। चौंका देने वाली बात ये है कि रिटायर्ड बैंकर को करीब 50 से ज्यादा दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर के रखा गया था। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस और NIA अधिकारी के तौर पर पेश किया था। आइए जानते हैं कि इस घटना के बारे में अब तक क्या जानकारी सामने आई है।

 ₹40.90 लाख की ठगी

साइबर ठगी के एक मामले में, दिल्ली पुलिस और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के अधिकारी बनकर ठगों ने भांडुप के एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर से लगभग ₹40.90 लाख की ठगी की। पीड़ित को यह कहकर भी डराया गया कि दिल्ली धमाकों में डॉक्टर शाहीन के फोन में पीड़ित का नाम मिला है। इस मामले में ईस्ट रीजन साइबर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।

कैसे हुई पूरी ठगी?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 61 वर्षीय पीड़ित, जो भांडुप का रहनेवाला है, पीड़ित को 10 मार्च 2026 को सिग्नल ऐप पर एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस और NIA का PSI रैंक का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित का नाम, आधार विवरण और मोबाइल नंबर दिल्ली बम धमाके के एक संदिग्ध के मोबाइल डेटा में सामने आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक के हुबली में पीड़ित के नाम पर एक बैंक खाता खोला गया है, जिसके जरिए ₹2.65 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पीड़ित को डराया।

50 दिनों हुई तक ठगी

डिजिटल अरेस्ट के बहाने पीड़ित को एक अलग कमरे में रहने और लगातार कॉल पर बने रहने के लिए कहा गया। डर और दबाव बनाकर ठगों ने करीब 50 दिनों में RTGS के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹40.90 लाख ट्रांसफर करवा लिए। 11 मार्च 2026 को पीड़ित ने करूर वैश्य बैंक के एक खाते में ₹2.90 लाख ट्रांसफर किए। इसके दो दिन बाद, 13 मार्च को उसने ICICI बैंक के एक खाते में ₹28 लाख भेजे। इसके बाद 18 मार्च को उसने इंडसइंड बैंक के एक खाते में ₹10 लाख ट्रांसफर किए। यह राशि उसकी पत्नी द्वारा लिए गए लोन से जुटाई गई थी।

पैसे मिलने के बाद आरोपियों ने पीड़ित को बताया कि मामला बंद हो गया है और अपने फोन बंद कर दिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन नंबर (1930) पर संपर्क किया और साइबर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। इस घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है, और आगे की जांच जारी है।

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