महाराष्ट्र के नवी मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी और ठाणे के एक ट्रैवल ऑपरेटर को अपने बढ़ते क्रेडिट कार्ड बकाया को कम करने का आसान तरीका महंगा पड़ गया। पुलिस के अनुसार, दोनों अनजाने में झारखंड के कुख्यात जामताड़ा साइबर ठगी गिरोह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा बन गए। मामला तब सामने आया जब मुंबई के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से 5.44 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान पुलिस को इस रैकेट की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि आरोपी गोविंद मंडल व्यापारियों से दोस्ती कर उनके क्रेडिट कार्ड के बकाया साइबर अपराध से प्राप्त रकम से चुकाता था और बदले में उनसे नकद वसूलता था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को छिपाने का एक नया तरीका अपनाया है, जिसका मुंबई की कफ परेड पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने नवी मुंबई के बेलापुर से दो आरोपियों (मदन साहू और गोपाल मंडल) को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को सीधे व्यापारियों के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने में इस्तेमाल करता था और बदले में उनसे नकद पैसे लेता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब मुंबई के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से 5.44 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। ठगों ने खुद को गैस कंपनी का कर्मचारी बताकर पीड़ित को एक फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। ऐप इंस्टॉल होते ही अपराधियों को मोबाइल का रिमोट एक्सेस मिल गया और उन्होंने बैंकिंग व क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से लाखों रुपये निकाल लिए।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि चोरी की रकम किसी फर्जी बैंक खाते में नहीं भेजी जा रही थी। इसके बजाय इस पैसे से विभिन्न राज्यों के व्यापारियों के क्रेडिट कार्ड बिल चुकाए जा रहे थे। गिरोह ऐसे व्यापारियों को निशाना बनाता था जिनके कार्ड पर बड़ी रकम बकाया होती थी। उन्हें कम पैसे में पूरा बिल साफ कराने का लालच दिया जाता था। बिल भरने के बाद व्यापारी गिरोह के लोगों को नकद पैसे दे देते थे। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। आरोपियों के मोबाइल फोन से कई लोगों के क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग संबंधी दस्तावेज मिले हैं।
दो आरोपी गिरफ्तार हुए
उल्वे के कपड़ा व्यापारी विक्की ठाक्कर का करीब 1.5 लाख रुपये और ठाणे के ट्रैवल ऑपरेटर शैलेश जाधव का लगभग 2 लाख रुपये का बकाया इसी तरीके से चुकाया गया। बाद में दोनों ने आरोपी को नकद रकम सौंप दी। पूछताछ में दोनों ने दावा किया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनके कार्ड का भुगतान साइबर ठगी के पैसों से किया गया है। हालांकि, उनकी जानकारी के आधार पर कफ परेड पुलिस ने गोविंद मंडल और उसके साथी मदन साहू उर्फ सॉ को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने अब तक 26 क्रेडिट कार्ड बिल साइबर ठगी की रकम से चुकाए जाने के सबूत जुटाए हैं। प्रारंभिक जांच में 100 से अधिक व्यापारियों के इस नेटवर्क से लाभान्वित होने की आशंका जताई गई है। मामले की आगे जांच जारी है।
साइबर ठगों का नया खेल
जामताड़ा के नए साइबर ठगी माड्यूल की स्टेप बाय स्टेप जानकारी और चोरी के पैसे से क्रेडिट कार्ड बिल भरकर कैश में पेमेंट वसूलने का तरीका सामने आ गया है।
1 : ठग निवेश घोटालों, फर्जी कस्टमर केयर कॉल, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड या फिशिंग के जरिए लोगों से पैसे ठगते हैं।
2 : म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल करने के बजाय वे ऐसे लोगों की तलाश करते हैं जिन पर क्रेडिट कार्ड का भारी बकाया हो। इसके लिए वे एजेंटों की मदद से खासकर व्यापारियों और नकदी संकट से जूझ रहे छोटे कारोबारियों को निशाना बनाते हैं।
3 : एजेंट कार्डधारकों से संपर्क कर दावा करते हैं कि बैंक में उनके “संपर्क” हैं और वे 20% से 30% की छूट पर उनका बकाया निपटा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, 1 लाख रुपये के बकाये को 70 से 80 हजार रुपये में सेटल कराने का प्रस्ताव दिया जाता है।
4 : साइबर अपराध से चोरी किए गए पैसों का इस्तेमाल कर ठग वैध भुगतान माध्यमों के जरिए सीधे कार्डधारक के क्रेडिट कार्ड का बकाया चुका देते हैं।
5 : बैंक से भुगतान की पुष्टि मिलने के बाद कार्डधारक यह मानकर कि उसे असली छूट मिली है, ठगों को नकद रकम लौटा देता है।
6 : इस तरह साइबर अपराध से हासिल रकम ‘साफ’ नकदी में बदल जाती है। चोरी का पैसा कई म्यूल अकाउंट्स से गुजारे बिना सीधे नकद में परिवर्तित हो जाता है। ठगों के हाथ इस्तेमाल योग्य नकदी लग जाती है, जबकि क्रेडिट कार्ड का बिल वैध रूप से जमा दिखता है।
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