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मुंबई: कमर्शियल गैस की कमी का दिख रहा प्रभाव, सबसे पुराने होटलों में एक "आनंद भवन" के मेन्यू से कई व्यंजन डिलिस्ट किए गए

 Reported By: Dinesh Mourya Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Mar 13, 2026 09:56 am IST,  Updated : Mar 13, 2026 10:03 am IST

मुंबई में कमर्शियल गैस की कमी का असर दिखने लगा है। यहां के सबसे पुराने होटलों में से एक आनंद भवन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है।

Anand Bhavan- India TV Hindi
आनंद भवन Image Source : ANAND BHAVAN/FACEBOOK

मुंबई: मुंबई के सबसे पुराने होटल में से एक'आनंद भवन' के मेन्यू से कुछ दक्षिण और उत्तर भारतीय व्यंजनों को डिलिस्ट किया गया है। मुंबई के माटुंगा इलाके में स्थित आनंद भवन होटल 85 वर्ष पुराना है। मुंबई के अलग-अलग इलाकों से लोग यहां दक्षिण भारतीय व्यंजनों का आनंद लेने आते हैं। लेकिन कर्मशियल गैस की कमी की वजह से इस होटल के 4 मशहूर व्यंजन जैसे प्लेन उथप्पा, ऑनियन उथप्पा, पुरी भाजी और रवा उथप्पा को डिलिस्ट कर दिया गया है।

क्यों डिलिस्ट किए गए ये व्यंजन?

इन व्यंजनों को बनाने के लिए ज्यादा गैस का इस्तेमाल होता है। पिछले हफ्ते भर से इस होटल में कमर्शियल गैस की सप्लाई नहीं हुई है। होटल मैनेजर के मुताबिक, अगर आज गैस की सप्लाई नहीं हुई तो संभवत: अगले दो दिनों में होटल के ऑपरेशन को बंद करना पड़ेगा।

देशभर से सामने आ रहे गैस की कमी के मामले

देशभर से सिलेंडर की कमी के मामले सामने आ रहे हैं, फिर चाहें वो कमर्शियल सिलेंडर हों या फिर घरों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर हो। सिलेंडर लेने के लिए गैस सिलेंडर की एजेंसियों और गैस सिलेंडर के गोदामों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं। लोग सिलेंडरों को ब्लैक में खरीदने के लिए मोटी धनराशि भी खर्च कर रहे हैं और कई बार तो मोटी धनराशि चुकाने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।

सबसे ज्यादा परेशानी कमर्शियल सिलेंडरों का इस्तेमाल करने वालों को हो रही है। होटलों, रेस्तरां और तमाम तरह के खाद्य पदार्थों का काम करने वाले लोगों के पास कमर्शियल सिलेंडर ना पहुंचने से उनका व्यापार रुक गया है, या फिर उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

हालांकि सरकार का कहना है कि देश में  गैस और तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई चैन में कोई रुकावट नहीं है।

बता दें कि पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत रोकने के लिए सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई है। ये कमेटी इस मामले को सुलझाने और नीतियां बनाने का काम करेगी। पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति की मॉनिटरिंग का जिम्मा इस कमेटी पर ही है। देखना ये होगा कि गैस की कमी कब तक पूरी होती है।

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