मुंबई की हार्बर लाइन पर लोकल रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं। चेंबूर के पास ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर पर कपड़ा फेंके जाने से तकनीकी खराबी उत्पन्न हो गई। इसके चलते हार्बर लाइन की अप और डाउन दोनों दिशाओं की ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं। पीक आवर के दौरान आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई ट्रेनें लेट हुईं, जबकि कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से रोका गया। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर ओवरहेड वायर से कपड़ा हटाया और सेवा बहाल की। हालांकि, रेलवे की तरफ से कहा गया कि ओवरहेड वायर के ऊपर तार गिरने से फॉल्ट हुआ।
रेलवे की टीम मौके पर पहुंची और टेक्निकल फॉल्ट को ठीक कर सामान्य रूप से ट्रेनों का संचालन शुरू किया। हालांकि, ट्रेन में खराबी ऐसे समय पर आई, जब बड़ी संख्या में लोग ऑफिस जाते हैं। इस वजह से हजारों लोगों को परेशानी हुई। कई लोगों को बीच में ही अपना सफर रोकना पड़ा। इसके बाद वह दूसरे साधन लेकर अपने ऑफिस तक पहुंचे।
9.10 बजे बंद हुई सेवाएं
अधिकारियों ने बताया कि मुंबई में चेंबूर स्टेशन के पास ओवरहेड इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट पर कुछ तार गिर गए थे। इस वजह से शुक्रवार सुबह रश आवर्स के दौरान सेंट्रल रेलवे की हार्बर लाइन पर लोकल ट्रेन सर्विस में रुकावट आई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रुकावट की खबर सुबह 9.45 बजे मिली, हालांकि प्रभावित कॉरिडोर पर ट्रेन सर्विस सुबह 9.10 बजे से ही बंद हो गई थी। सेंट्रल रेलवे के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मरम्मत का काम शुरू किया।
9.52 बजे सामान्य रूप से शुरू हुआ ट्रैफिक
सेंट्रल रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा कि रुकावट चेंबूर स्टेशन के पास ओवरहेड इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट पर बाहरी तार गिरने की वजह से हुई, जिससे अप हार्बर लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ा। प्रवक्ता ने आगे कहा कि रुकावट हटाने के बाद सुबह 9.52 बजे ट्रैफिक बहाल हो गया। इस रुकावट की वजह से हार्बर लाइन पर सबअर्बन सर्विस में 15 से 20 मिनट की देरी हुई। हार्बर लाइन साउथ मुंबई से नवी मुंबई और वेस्टर्न सबअर्बन को सबअर्बन ट्रेन कनेक्टिविटी देती है।
रोजाना 90 लाख से ज्यादा यात्री करते हैं सफर
मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं से रोजाना 90 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। सुबह और शाम के समय ट्रेनें खचाखच भरी रहती हैं। इस वजह से अक्सर हादसे भी होते हैं। औसतन 6-7 लोग रोजाना सफर के दौरान जान गंवा देते हैं। मुंबई लोकल ट्रेनों में सफर के दौरान साल भर में औसतन 2,200 से 2,500 लोगों की मौत हो जाती है। गवर्नमेंट रेलवे पुलिस के अनुसार 2024 में 2,468 मौतें हुई थीं।
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